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पंजाब की शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल: शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों में 40% से ज्यादा पद खाली
पूर्व शिक्षा मंत्री परगट सिंह का सरकार पर हमला, बोले- सरकारी स्कूलों में भी 18 हजार से अधिक शिक्षण पद रिक्त
पंजाब डेस्क। विशेष :
पंजाब की शिक्षा व्यवस्था को लेकर कांग्रेस विधायक और पूर्व शिक्षा मंत्री परगट सिंह ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब के शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों में 40 प्रतिशत से अधिक अकादमिक पद खाली पड़े हैं, जो राज्य की शिक्षा व्यवस्था के लिए बेहद चिंताजनक स्थिति है। परगट सिंह ने कहा कि जिस सरकार ने अपने कार्यकाल में ‘शिक्षा क्रांति’ लाने के बड़े-बड़े दावे किए, उसी सरकार के कार्यकाल में शिक्षकों को तैयार करने वाली संस्थाएं ही शिक्षकों और अकादमिक स्टाफ की भारी कमी से जूझ रही हैं।
परगट सिंह ने कहा कि पंजाब के सरकारी स्कूलों में भी 18 हजार से अधिक शिक्षण पद खाली पड़े हैं। उन्होंने दावा किया कि लुधियाना, जालंधर, होशियारपुर और अमृतसर सहित कई जिले शिक्षकों की कमी से सबसे अधिक प्रभावित हैं। राज्य के पांच सीमावर्ती जिलों में भी शिक्षकों की कमी गंभीर बनी हुई है, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई पर सीधा असर पड़ने की आशंका है।
उन्होंने उपलब्ध आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि पंजाब में सरकारी शिक्षकों के कुल 1,03,000 स्वीकृत पदों में से करीब 17.48 प्रतिशत पद अभी भी खाली हैं। उन्होंने इसे सरकार की शिक्षा व्यवस्था के प्रति कथित लापरवाही का स्पष्ट उदाहरण बताया।
पूर्व शिक्षा मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से की गई समीक्षा में भी पंजाब के शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों में बड़ी संख्या में रिक्तियों का खुलासा हुआ है। उनके अनुसार स्टेट काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (SCERT) में 31 प्रतिशत अकादमिक पद और डिस्ट्रिक्ट इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन एंड ट्रेनिंग (DIET) में 45 प्रतिशत अकादमिक पद खाली हैं।
परगट सिंह ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में शिक्षा सुधार को लेकर गंभीर है तो उसे केवल प्रचार अभियानों तक सीमित रहने के बजाय शिक्षा संस्थानों की बुनियादी क्षमता को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों में पर्याप्त अकादमिक स्टाफ और सरकारी स्कूलों में पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम है।
कांग्रेस विधायक ने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक समस्याओं को दूर करने के बजाय अन्य मुद्दों पर अधिक ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन कर रहे लोगों की आवाज सुनने और उनकी समस्याओं का समाधान करने के बजाय सरकार कथित तौर पर बल प्रयोग का रास्ता अपना रही है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि पंजाब के सरकारी स्कूलों और शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों में खाली पड़े पदों को तत्काल भरा जाए और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए ठोस एवं दीर्घकालिक नीति बनाई जाए।

