Dial 112 - सिस्टम ऑन, सेवा ऑफ : “कागजों में तेज, जमीनी हकीकत में लेट— सिस्टम की असल कहानी”

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चंडीगढ़/होशियारपुर: पंजाब में आम लोगों की सुरक्षा के लिए शुरू किया गया इमरजेंसी हेल्पलाइन सिस्टम Dial 112 अब सवालों के घेरे में आ गया है। हाल ही में Comptroller  and Auditor General of India (CAG) की रिपोर्ट में इस सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर खामियां उजागर हुई हैं, जिससे पूरे राज्य में इमरजेंसी सेवाओं की स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है।

रिपोर्ट के अनुसार, Dial 112 सेवा के लिए आवश्यक संसाधनों की भारी कमी है। जहां इस प्रोजेक्ट के तहत करीब 1866 वाहनों की जरूरत थी, वहीं मौके पर केवल 258 वाहन ही उपलब्ध पाए गए। ऐसे में किसी भी आपात स्थिति में समय पर मदद पहुंचाना बड़ी चुनौती बन गया है।

इसके अलावा, रिस्पॉन्स टाइम को लेकर भी रिपोर्ट में गंभीर सवाल उठाए गए हैं। कई मामलों में कॉल रिसीव होने के बाद टीम को मौके पर पहुंचने में देरी दर्ज की गई, जिससे लोगों की सुरक्षा पर सीधा असर पड़ रहा है।

तकनीकी स्तर पर भी सिस्टम कमजोर पाया गया है। पुलिस स्टेशनों में आधुनिक उपकरणों की कमी और मोबाइल डेटा टर्मिनल (MDT) का अभाव, ग्राउंड स्तर पर तालमेल को प्रभावित कर रहा है। हैरानी की बात यह भी है कि इतने बड़े प्रोजेक्ट के लिए अब तक स्पष्ट Standard Operating Procedures (SOPs) तक तैयार नहीं किए गए।

निगरानी व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं पाई गई। रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट की समीक्षा के लिए बनाई गई Apex Committee की नियमित बैठकें नहीं हुईं, जिससे सिस्टम की मॉनिटरिंग लगभग नगण्य रही।

Dial 112 का उद्देश्य पुलिस, फायर ब्रिगेड और एम्बुलेंस सेवाओं को एक ही प्लेटफॉर्म पर लाकर लोगों को त्वरित सहायता उपलब्ध कराना था, लेकिन एजेंसियों के बीच तालमेल की कमी इस लक्ष्य को पूरा करने में बाधा बन रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस सिस्टम में जल्द सुधार नहीं किया गया, तो इसका सीधा असर आम जनता की सुरक्षा पर पड़ेगा।

Dial 112 को आधुनिक और प्रभावी इमरजेंसी सिस्टम बनाने के बड़े दावे किए गए थे, लेकिन मौजूदा स्थिति में यह सिस्टम जमीनी स्तर पर कमजोर नजर आ रहा है। ऐसे में सरकार के लिए जरूरी हो गया है कि वह इस दिशा में ठोस कदम उठाए, ताकि लोगों को समय पर और बेहतर सहायता मिल सके।


Source:-Times of India
Edited By: Rajinder Maddy

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