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‘शिक्षा क्रांति’ के दावे बड़े, भरोसा छोटा: 31 में से सिर्फ 1 आप विधायक के बच्चे सरकारी स्कूल में
- रिपोर्ट में खुलासा — ज्यादातर विधायकों के बच्चे निजी और विदेशी स्कूलों में पढ़ रहे, सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
होशियारपुर :
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने पंजाब में 117 में से 92 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। चुनाव के दौरान पार्टी ने अपने दिल्ली मॉडल के आधार पर “सिख्या क्रांति” यानी शिक्षा क्रांति लाने का वादा किया था, जिसके तहत सरकारी स्कूलों को आधुनिक और भरोसेमंद बनाने की बात कही गई थी।
चार वर्ष बाद शिक्षा के क्षेत्र में कुछ सुधार के संकेत जरूर मिले हैं और कई मानकों पर पंजाब का प्रदर्शन राष्ट्रीय औसत से बेहतर बताया जा रहा है। हालांकि एक हालिया जांच ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर नया सवाल खड़ा कर दिया है। 'द इंडियन एक्सप्रेस ' की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के अधिकांश विधायक अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए सरकारी स्कूलों की बजाय निजी या विदेशी संस्थानों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब विधानसभा के 117 विधायकों में से 36 ऐसे हैं जिनके बच्चे स्कूल में पढ़ते हैं। इनमें 31 विधायक आम आदमी पार्टी के हैं, जबकि दो इंडियन नेशनल कांग्रेस , एक शिरोमणि अकाली दल, एक बहुजन समाज पार्टी और एक निर्दलीय विधायक शामिल हैं।
सबसे अहम तथ्य यह सामने आया कि 31 आप विधायकों में से केवल एक विधायक सुखवीर सिंह माइसरखाना (मौर, बठिंडा) ने अपने बच्चों को 2025-26 शैक्षणिक सत्र में सरकारी स्कूल में पढ़ने के लिए दाखिल कराया है। बाकी लगभग सभी 30 विधायकों के बच्चे निजी स्कूलों या विदेशों के शिक्षण संस्थानों में पढ़ रहे हैं।
जांच में यह भी सामने आया कि इन 31 विधायकों में से कम से कम 25 ने अपने बच्चों का दाखिला निजी स्कूलों में पहले ही करा दिया था, यानी वे विधायक बनने से पहले ही निजी शिक्षा का विकल्प चुन चुके थे। हालांकि शिक्षा सुधारों का प्रभाव जमीन पर दिखने में समय लगना स्वाभाविक माना जा रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, 27 आप विधायकों ने अपने बच्चों को भारत के निजी स्कूलों में दाखिल कराया है। इनमें कई बच्चे देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में पढ़ रहे हैं, जैसे द दून स्कूल , द लॉरेंस स्कूल और द सिंधिया स्कूल।
इनमें से 10 विधायकों ने अपने बच्चों को चंडीगढ़ या पंजाब से बाहर स्थित रेजिडेंशियल स्कूलों में भेजा है, जिनमें तीन राज्य मंत्री भी शामिल हैं। वहीं 17 विधायकों के बच्चे अपने ही विधानसभा क्षेत्रों के निजी स्कूलों—ज्यादातर अंग्रेज़ी माध्यम कॉन्वेंट स्कूलों—में पढ़ रहे हैं।
इसके अलावा दो आप विधायकों ने बताया कि उनके बच्चे विदेशों में पढ़ रहे हैं। एक विधायक के अनुसार उनकी पत्नी और बच्चे अमेरिका के नागरिक हैं और वहीं रहते हैं, जबकि दूसरे विधायक की पत्नी ब्रिटेन की नागरिक हैं और उनका बेटा लंदन में पढ़ाई कर रहा है। एक अन्य विधायक ने यह भी बताया कि उनके बच्चे होम-स्कूलिंग के जरिए शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
गैर-आप विधायकों की बात करें तो उनके बच्चों की पढ़ाई भी निजी स्कूलों में ही हो रही है। कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल, बहुजन समाज पार्टी और निर्दलीय विधायक—सभी ने अपने बच्चों के लिए निजी शिक्षा को ही प्राथमिकता दी है।
जब आप विधायकों से पूछा गया कि उन्होंने अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में क्यों नहीं पढ़ाया, तो कई कारण सामने आए। इनमें निजी स्कूलों की तुलना में अवसरों की कमी, शिक्षा की गुणवत्ता में अंतर, अंग्रेज़ी माध्यम का बेहतर माहौल, सामाजिक दबाव और बच्चों को राज्य शिक्षा बोर्ड में स्थानांतरित करने की अनिच्छा जैसे कारण शामिल हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि पंजाब में सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे और सीखने के स्तर में सुधार जरूर हुआ है, लेकिन विधायकों के निजी फैसले यह भी दर्शाते हैं कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था में भरोसा अभी पूरी तरह मजबूत नहीं हो पाया है। यही कारण है कि “शिक्षा क्रांति” के दावों के बीच यह मुद्दा अब राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बन गया है।

