“मुकेश अंबानी ने Zee को हथियाने की कोशिश की, मुझे कर्ज चुकाने से रोका”: सुभाष चंद्रा का बड़ा आरोप

By Rajbir
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नेशनल डेस्क : ज़ी समूह के संस्थापक सुभाष चंद्रा ने उद्योगपति मुकेश अंबानी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। चंद्रा ने दावा किया कि जब वह आर्थिक संकट के दौरान अपनी कंपनी बेचकर बैंकों का कर्ज चुकाने की कोशिश कर रहे थे, तब मुकेश अंबानी ने उन्हें ऐसा न करने की सलाह दी थी। 

चंद्रा के मुताबिक, उन्होंने अंबानी से ज़ी को बेचने के संबंध में बातचीत की थी ताकि बैंकों का बकाया चुकाया जा सके। उनका दावा है कि उस दौरान अंबानी ने उनसे कहा था, “आप बैंकों का पैसा ब्याज समेत क्यों चुका रहे हैं? कोई नहीं चुकाता।” चंद्रा ने यह भी आरोप लगाया कि रिलायंस की ओर से ज़ी को अपने नियंत्रण में लेने की कोशिश की गई थी। 

👉 Zee को लेकर पुरानी कारोबारी जंग का जिक्र

सुभाष चंद्रा ने अपने बयान में ज़ी और इनवेस्को से जुड़े पुराने घटनाक्रम का भी उल्लेख किया। उनका कहना है कि रिलायंस की ओर से ज़ी में रुचि दिखाई गई थी, लेकिन प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया गया और बाद में ज़ी-सोनी विलय की दिशा में कदम बढ़ाया गया। 

चंद्रा ने यह भी कहा कि उनके समूह पर करीब 45,000 करोड़ रुपये का कर्ज था, जिसमें से लगभग 43,000 करोड़ रुपये की अदायगी ज़ी के शेयरों और निजी संपत्तियों को बेचकर की गई। हालांकि, उनके व्यक्तिगत दिवालिया मामले में सामने आई करीब 22,006 करोड़ रुपये की राशि को लेकर भी विवाद है। चंद्रा का कहना है कि यह उनकी ओर से व्यक्तिगत रूप से लिया गया कर्ज नहीं था, बल्कि कंपनियों के कर्ज के लिए दी गई व्यक्तिगत गारंटियों से संबंधित दावे थे। 

👉 रिलायंस ने आरोपों को बताया बेबुनियाद

सुभाष चंद्रा के आरोपों पर रिलायंस ने इन्हें “बेबुनियाद” बताते हुए खारिज किया है। कंपनी ने कहा कि उसके मीडिया ब्रांडों का इस्तेमाल किसी व्यक्ति पर हमला करने के लिए नहीं किया गया है। रिलायंस ने चंद्रा के प्रति सम्मान जताते हुए उनके भविष्य के लिए शुभकामनाएं भी दीं। 

👉 कर्ज मामले में NCLT के फैसले से भी विवाद

यह पूरा विवाद ऐसे समय सामने आया है जब एनसीएलटी ने सुभाष चंद्रा की व्यक्तिगत दिवालिया प्रक्रिया में करीब 22,006 करोड़ रुपये के स्वीकार किए गए दावों के मुकाबले 6.25 करोड़ रुपये की व्यक्तिगत भुगतान योजना को मंजूरी दी है। कुछ बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने इस फैसले का विरोध किया है और इसे चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं।  

हालांकि, विशेषज्ञों और सरकारी सूत्रों के अनुसार इसे सीधे तौर पर 22,000 करोड़ रुपये के बैंक कर्ज की “माफी” कहना सही नहीं होगा, क्योंकि यह राशि मुख्य रूप से सुभाष चंद्रा की व्यक्तिगत गारंटी से जुड़े दावों को दर्शाती है और मूल कर्जदार कंपनियों पर उनकी देनदारी अलग बनी रहती है। 

सुभाष चंद्रा के आरोपों ने ज़ी समूह, रिलायंस और भारतीय कॉरपोरेट जगत के पुराने कारोबारी विवाद को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।

Edited By: Rajbir

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