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मां कर रही थीं अंतिम संस्कार की तैयारी, 25 साल बाद उसी शख्स ने ब्राज़ील को विश्व कप से किया बाहर
स्पोर्ट्स डेस्क। कभी ऐसा दौर भी था जब उनकी मां उनके अंतिम संस्कार की तैयारी कर रही थीं। डॉक्टरों ने उम्मीद छोड़ दी थी, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। मौत को मात देकर लौटे स्टॉल सोलबाकेन ने न सिर्फ नई जिंदगी पाई, बल्कि 25 वर्ष बाद ऐसा इतिहास रच दिया, जिसकी गूंज पूरी फुटबॉल दुनिया में सुनाई दे रही है।
58 वर्षीय स्टॉल सोलबाकेन की अगुवाई में नॉर्वे ने अमेरिका में खेले जा रहे फुटबॉल विश्व कप में सबसे बड़ा उलटफेर करते हुए पांच बार की विश्व चैंपियन ब्राज़ील को रोमांचक मुकाबले में हराकर टूर्नामेंट से बाहर कर दिया। मैच समाप्त होने के बाद सोलबाकेन अपने परिवार से भावुक होकर गले मिले। यह पल उनके लिए किसी सपने के सच होने से कम नहीं था।
दरअसल, 13 मार्च 2001 को प्रशिक्षण के दौरान सोलबाकेन को अचानक दिल का दौरा पड़ा था। उनका दिल करीब सात मिनट तक धड़कना बंद हो गया था। डॉक्टरों की अथक कोशिशों के बाद उनकी जान बचाई जा सकी, लेकिन वह 26 घंटे तक कोमा में रहे। बाद में उस कठिन दौर को याद करते हुए उन्होंने कहा था, "मेरी मां मेरे अंतिम संस्कार की तैयारी कर रही थीं।"
लंबे इलाज और पुनर्वास के बाद सोलबाकेन ने जीवन की नई शुरुआत की। खिलाड़ी के रूप में उनका करियर भले ही समाप्त हो गया, लेकिन उन्होंने कोचिंग की जिम्मेदारी संभाली और अपने नेतृत्व से नॉर्वे की राष्ट्रीय टीम को नई पहचान दिलाई। आज उनकी कहानी इस बात का प्रमाण है कि मजबूत इरादों के सामने बड़ी से बड़ी मुश्किल भी हार मान लेती है।
ब्राज़ील जैसी दिग्गज टीम पर मिली यह जीत केवल एक खेल उपलब्धि नहीं, बल्कि संघर्ष, आत्मविश्वास और कभी हार न मानने की प्रेरणादायक मिसाल भी बन गई है। स्टॉल सोलबाकेन का जीवन आज दुनिया भर के खिलाड़ियों और युवाओं के लिए उम्मीद और हौसले का प्रतीक है।

