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हाईकोर्ट में दो बार जीत के बाद भी एरियर का इंतजार, 425 एडेड स्कूलों के 1400 कर्मचारी वेतन संकट में
नौ महीनों से वेतन न मिलने का दावा, गहने गिरवी रखकर गुजारा करने को मजबूर कर्मचारी; यूनियन ने सरकार को आंदोलन की चेतावनी दी
जनगाथा टाइम्स विशेष ।
होशियारपुर।
पंजाब के एडेड स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों ने राज्य सरकार पर उनकी मांगों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। कर्मचारी यूनियन का कहना है कि पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में दो बार मामला जीतने और सरकार द्वारा अदालत में हलफनामा देकर छठे वेतन आयोग के एरियर का भुगतान करने का आश्वासन दिए जाने के बावजूद कर्मचारियों और पेंशनरों को उनका पूरा बकाया नहीं मिल पाया है।
यूनियन नेताओं के अनुसार पंजाब के करीब 425 एडेड स्कूलों में लगभग 1400 शिक्षक और अन्य कर्मचारी कार्यरत हैं। उनका दावा है कि इनमें से बड़ी संख्या में कर्मचारियों को पिछले करीब नौ महीनों से वेतन नहीं मिला है, जिसके कारण उनके परिवार गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं।
गहने गिरवी रखकर परिवार चलाने का दावा
यूनियन ने कहा कि लंबे समय से वेतन नहीं मिलने के कारण कर्मचारियों के सामने घर का राशन, बच्चों की फीस, दूध और अन्य जरूरी खर्च पूरे करना मुश्किल हो गया है। कई कर्मचारी आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए अपनी पत्नियों के गहने बेचने या गिरवी रखने को मजबूर हैं। वहीं कुछ कर्मचारियों ने रिश्तेदारों और परिचितों से उधार लेने के बाद घर-मकान की रजिस्ट्रियां गिरवी रखकर कर्ज लेने का दावा भी किया है।
यूनियन नेताओं का कहना है कि बैंक की किश्तें समय पर न चुका पाने वाले कर्मचारियों को नोटिस तक मिलने लगे हैं। उनका आरोप है कि पूरी ईमानदारी से नौकरी करने के बावजूद कर्मचारी लगातार कर्ज के बोझ में दबते जा रहे हैं।
512 से घटकर 425 रह गए एडेड स्कूल
कर्मचारी नेताओं के मुताबिक वर्ष 1967 में पंजाब में 512 एडेड स्कूल थे। सेवानिवृत्त कर्मचारियों के स्थान पर नई नियुक्तियां न होने के कारण करीब 87 स्कूल बंद हो गए और अब इनकी संख्या लगभग 425 रह गई है। यूनियन का दावा है कि कभी इन स्कूलों में करीब 9468 पद स्वीकृत थे, लेकिन वर्ष 2003 के बाद नई भर्ती नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में पद खाली होते चले गए।
एरियर को लेकर सरकार पर वादा पूरा नहीं करने का आरोप
यूनियन नेताओं का कहना है कि सरकार ने हाईकोर्ट में यह आश्वासन दिया था कि एडेड स्कूलों के कर्मचारियों और पेंशनरों को भी सरकारी कर्मचारियों की तर्ज पर छठे वेतन आयोग से संबंधित बकाया राशि का भुगतान किया जाएगा। उनका आरोप है कि सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों को एरियर का भुगतान शुरू होने के बावजूद एडेड स्कूलों के कर्मचारियों को अभी तक इसका पूरा लाभ नहीं मिला है।
सरकारी स्कूलों में विलय की मांग
एडेड स्कूल कर्मचारी यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष गुरमीत सिंह मदनीपुर, महासचिव शरणजीत सिंह कादीमाजरा और पेंशनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष गुरचरण सिंह चाहल ने कहा कि कर्मचारी पिछले साढ़े चार वर्षों से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हुआ।
उन्होंने सरकार से मांग की कि पिछले सभी महीनों का वेतन तत्काल जारी किया जाए, सेवानिवृत्त कर्मचारियों के पीपीओ जारी किए जाएं और छठे वेतन आयोग के लंबित एरियर का भुगतान सरकारी कर्मचारियों की तर्ज पर किया जाए।
यूनियन नेताओं ने मुख्यमंत्री पंजाब से एडेड स्कूलों के कर्मचारियों को सरकारी स्कूलों में विलय (मर्जर) करने की मांग भी की। उनका कहना है कि इससे कर्मचारियों को सरकारी स्कूलों के शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों के समान सुविधाएं मिल सकेंगी और एडेड स्कूलों से जुड़ी लंबे समय से चली आ रही समस्याओं का स्थायी समाधान हो सकता है।
यूनियन ने चेतावनी दी कि यदि जल्द वेतन जारी नहीं किया गया और लंबित एरियर का भुगतान शुरू नहीं हुआ तो कर्मचारी आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।

