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उम्र 92 साल... हाथ में स्टेथोस्कोप और मरीजों की सेवा का जुनून आज भी बरकरार
68 साल से चिकित्सा सेवा दे रहीं डॉ. सूरी श्रीमाथी, आज भी जरूरत पड़ने पर करती हैं सर्जरी
कवर स्टोरी |
उम्र के साथ अक्सर इंसान की रफ्तार धीमी पड़ जाती है। जिंदगी के 90वें पड़ाव तक पहुंचते-पहुंचते ज्यादातर लोग आराम को अपना साथी बना लेते हैं। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जिनके लिए उम्र सिर्फ एक संख्या होती है और सेवा का संकल्प कभी बूढ़ा नहीं होता।
हैदराबाद की डॉ. सूरी श्रीमाथी ऐसी ही एक प्रेरणादायक मिसाल हैं। 92 वर्ष की उम्र में भी वह चिकित्सा के क्षेत्र में सक्रिय हैं और मरीजों का इलाज कर रही हैं। उनके हाथों में आज भी स्टेथोस्कोप है, चेहरे पर आत्मविश्वास है और मरीजों की सेवा करने का वही जुनून बरकरार है, जो करीब सात दशक पहले उनके मेडिकल करियर की शुरुआत के समय था।
वर्ष 1958 में एमबीबीएस की डिग्री हासिल करने के बाद डॉ. सूरी श्रीमाथी ने चिकित्सा क्षेत्र में कदम रखा। इसके बाद उन्होंने अपनी जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा मरीजों की सेवा में समर्पित कर दिया। आज 68 साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी उनका मेडिकल सफर जारी है।
सबसे खास बात यह है कि 92 वर्ष की उम्र में भी वह केवल मरीजों को देखने तक सीमित नहीं हैं। जरूरत पड़ने पर वह ऑपरेशन भी करती हैं और सिजेरियन डिलीवरी जैसी चिकित्सा सेवाओं में भी अपनी भूमिका निभाती हैं। जिस उम्र में लोग रोजमर्रा के कामों के लिए दूसरों पर निर्भर होने लगते हैं, उस उम्र में डॉ. श्रीमाथी आज भी अपने पेशे की जिम्मेदारियां पूरी आत्मविश्वास के साथ निभा रही हैं।
उनकी कहानी केवल एक डॉक्टर के लंबे करियर की कहानी नहीं है। यह उस जुनून की कहानी है, जिसने उम्र की हर सीमा को पीछे छोड़ दिया। यह उस समर्पण की कहानी है, जिसमें मरीजों की सेवा सबसे ऊपर रही। छह दशकों से ज्यादा समय तक चिकित्सा क्षेत्र में सक्रिय रहना और आज भी उसी उत्साह के साथ काम करना अपने आप में असाधारण उपलब्धि है।
डॉ. सूरी श्रीमाथी की जिंदगी यह संदेश देती है कि अगर काम के प्रति जुनून और सेवा का जज्बा दिल में हो, तो उम्र कभी रास्ते की दीवार नहीं बनती। उनका स्टेथोस्कोप आज भी न जाने कितनी जिंदगियों के लिए उम्मीद की आवाज बना हुआ है।
92 साल की उम्र में भी मरीजों के बीच मौजूद यह डॉक्टर एक सवाल जरूर छोड़ जाती हैं—क्या सच में उम्र इंसान की क्षमता तय करती है? डॉ. सूरी श्रीमाथी की जिंदगी इसका जवाब साफ शब्दों में देती है—नहीं।

