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कागजों में कमाई, कुर्सी पर लाखों का मान, चेयरमैन के हिसाब ने बढ़ाई सवालों की तान
नेशनल डेस्क।
कर्नाटक लोक सेवा आयोग के पूर्व चेयरमैन शिवशंकरप्पा एस. साहूकार का कार्यकाल गंभीर आरोपों और विवादों के बीच समाप्त हुआ। प्रश्नपत्र लीक, भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और उनकी बेटी की सरकारी नौकरी से जुड़े विवादों के बाद राज्यपाल ने उन्हें 25 अगस्त 2026 को निलंबित कर दिया था। मामले की जांच जारी है।
3.60 लाख वेतन, 40 हजार सालाना आय का दावा
मामले में सबसे ज्यादा चर्चा उस आय प्रमाणपत्र को लेकर हुई, जिसमें साहूकार के परिवार की वार्षिक आय 40,000 रुपये बताई गई थी। यह आंकड़ा इसलिए सवालों के घेरे में आया क्योंकि KPSC चेयरमैन के तौर पर साहूकार का मासिक वेतन करीब 3.6 लाख रुपये बताया गया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, उनकी बेटी सुमन साहूकार ने इसी आय प्रमाणपत्र के आधार पर अन्य पिछड़ा वर्ग के तहत आरक्षण का लाभ लेने का प्रयास किया था।
रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक में 2002 के एक सरकारी आदेश में लोक सेवा आयोग के चेयरमैन के बच्चों को पिछड़ा वर्ग आरक्षण का लाभ लेने से रोकने का प्रावधान भी बताया गया है। इस मामले में आय और अन्य जानकारी छिपाने के आरोपों की जांच की जा रही है।
बेटी की सरकारी नौकरी पर विवाद
साहूकार की बेटी सुमन साहूकार की उद्योग एवं वाणिज्य विभाग में औद्योगिक विस्तार अधिकारी के पद पर नियुक्ति भी जांच के दायरे में है। आरोप है कि नियुक्ति के दौरान कथित रूप से गलत आय प्रमाणपत्र का इस्तेमाल किया गया और अन्य पिछड़ा वर्ग कोटे का लाभ लिया गया। इस मामले में कर्नाटक उच्च न्यायालय के समक्ष भी मामला पहुंचा है।
400 पशु चिकित्सकों की भर्ती में प्रश्नपत्र लीक का आरोप
दूसरा बड़ा मामला 400 पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती से जुड़ा है। जांच के अनुसार, 29 चयनित अभ्यर्थियों पर आरोप है कि उन्हें परीक्षा से एक दिन पहले प्रश्नपत्र मिला था। मामले में KPSC के परीक्षा नियंत्रक रहे आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार की गिरफ्तारी भी हुई है। सीआईडी ने अदालत को बताया कि साहूकार की कथित तौर पर बिचौलिए बसवराज कन्नाले से इंटरनेट कॉल के माध्यम से लगातार बातचीत हुई थी। साहूकार से इस मामले में सीआईडी ने पूछताछ भी की।
ओएमआर शीट में छेड़छाड़ और भर्ती पर भी सवाल
KPSC के कार्यकाल से जुड़ी पुरानी शिकायतों में भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं और कथित तौर पर ओएमआर शीट से छेड़छाड़ के आरोप भी सामने आए हैं। भारतीय एक्सप्रेस की जांच के मुताबिक, 2019 के बाद से अधिकारियों की ओर से कई बार प्रक्रियागत गड़बड़ियों को लेकर आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं।
मामला अब जांच एजेंसियों के हाथ में
पशु चिकित्सकों की भर्ती में कथित अनियमितताओं को लेकर पुलिस जांच के अलावा प्रवर्तन निदेशालय ने भी KPSC से जुड़े मामले में कई स्थानों पर तलाशी ली है। जांच में प्रश्नपत्र लीक, ओएमआर शीट से छेड़छाड़ और कथित रिश्वतखोरी जैसे आरोपों की पड़ताल की जा रही है।
फिलहाल इन मामलों में सामने आए आरोपों की जांच जारी है और अदालतों में भी संबंधित मामले विचाराधीन हैं। इसलिए आरोपों को अंतिम रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता। जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट होगी।

