- Hindi News
- स्पेशल खबरें
- RBI के प्रमुख को ‘चेयरमैन’ नहीं, ‘गवर्नर’ क्यों कहते हैं? जानिए इसके पीछे की वजह
RBI के प्रमुख को ‘चेयरमैन’ नहीं, ‘गवर्नर’ क्यों कहते हैं? जानिए इसके पीछे की वजह
नेशनल डेस्क ।
भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI देश की मौद्रिक और बैंकिंग व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण संस्थान है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि RBI के प्रमुख को ‘चेयरमैन’ या ‘प्रेसिडेंट’ नहीं, बल्कि ‘गवर्नर’ क्यों कहा जाता है?
दरअसल, इसके पीछे ऐतिहासिक परंपरा और ब्रिटिश बैंकिंग व्यवस्था का प्रभाव माना जाता है। भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना RBI Act, 1934 के तहत हुई थी और 1935 में इसने काम करना शुरू किया। उस दौर में ब्रिटिश बैंकिंग प्रणाली, खासकर Bank of England, की संस्थागत परंपराओं का भारतीय केंद्रीय बैंक की संरचना पर भी प्रभाव था। इसी परंपरा के तहत RBI के शीर्ष पद का नाम ‘गवर्नर’ रखा गया।
‘गवर्नर’ शब्द का इस्तेमाल केंद्रीय बैंक के प्रमुख के लिए कई देशों में लंबे समय से होता आया है। RBI के गवर्नर देश की मौद्रिक नीति, बैंकिंग नियमन, मुद्रा प्रबंधन और वित्तीय स्थिरता से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं।
वहीं, ‘चेयरमैन’ शब्द आमतौर पर किसी कंपनी, बोर्ड या समिति के अध्यक्ष के लिए इस्तेमाल किया जाता है। RBI एक कंपनी नहीं, बल्कि देश का केंद्रीय बैंक और एक वैधानिक संस्था है। इसलिए इसके सर्वोच्च पद के लिए ‘चेयरमैन’ के बजाय ‘गवर्नर’ पदनाम का इस्तेमाल किया जाता है।
यानी, RBI के प्रमुख का पदनाम केवल एक नाम नहीं, बल्कि भारत की केंद्रीय बैंकिंग व्यवस्था और उसके ऐतिहासिक विकास से जुड़ी एक पुरानी संस्थागत परंपरा है।

