महज 15 हजार रुपये में बनी थी रामायण पर आधारित पहली भारतीय फिल्म ‘लंका दहन’, एक ही कलाकार ने निभाए थे राम और सीता के किरदार

On

1917 में दादा साहेब फाल्के ने मूक फिल्म के जरिए पर्दे पर उतारी थी रामायण की कहानी, दर्शकों के बीच खूब हुई थी लोकप्रिय

 

 

फ़िल्मी जगत । आज के दौर में फिल्मों के निर्माण पर करोड़ों और हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। भव्य सेट, आधुनिक तकनीक और बड़े कलाकारों से सजी फिल्में दर्शकों को आकर्षित कर रही हैं। लेकिन भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक ऐसा दौर भी था, जब महज 15 हजार रुपये में रामायण की कहानी को बड़े पर्दे पर उतार दिया गया था। इस ऐतिहासिक फिल्म का नाम था ‘लंका दहन’, जिसका निर्माण वर्ष 1917 में भारतीय सिनेमा के जनक दादा साहेब फाल्के ने किया था।

यह फिल्म भारतीय सिनेमा की शुरुआती पौराणिक फिल्मों में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है। फिल्म में रामायण के उस प्रसंग को दिखाया गया था, जिसमें माता सीता का अपहरण करने के बाद हनुमान जी लंका पहुंचते हैं और अपनी पूंछ में आग लगने के बाद पूरी लंका को जला देते हैं।

मूक फिल्म थी ‘लंका दहन’

उस समय फिल्मों में आवाज और संवाद की तकनीक उपलब्ध नहीं थी। इसलिए यह पूरी तरह मूक फिल्म थी। कलाकारों के अभिनय, चेहरे के भाव और दृश्यों के माध्यम से दर्शकों तक कहानी पहुंचाई गई थी। दादा साहेब फाल्के ने सीमित संसाधनों के बावजूद इस फिल्म को प्रभावशाली ढंग से तैयार किया था। फिल्म का प्रदर्शन 17 सितंबर 1917 को पुणे के आर्यन सिनेमा में हुआ था।

एक ही कलाकार बने थे राम और सीता

इस फिल्म की सबसे दिलचस्प बात यह थी कि अभिनेता अन्ना सालुंके ने भगवान श्रीराम और माता सीता, दोनों की भूमिकाएं निभाई थीं। उस दौर में महिलाओं का फिल्मों में काम करना आम नहीं था। इसी कारण महिला पात्रों की भूमिका भी पुरुष कलाकार निभाया करते थे। अन्ना सालुंके का दोनों किरदार निभाना भारतीय सिनेमा के इतिहास में पहली बार किसी कलाकार द्वारा दोहरी भूमिका निभाने की महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है। फिल्म में हनुमान जी की भूमिका गणपत जी शिंदे ने निभाई थी।

बॉक्स ऑफिस पर भी रही सफल

‘लंका दहन’ ने उस समय दर्शकों के बीच जबरदस्त लोकप्रियता हासिल की थी। मुंबई के सिनेमाघरों में फिल्म के शो लगातार भरे रहते थे। ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, मुंबई के नाज टॉकीज में फिल्म ने पहले सप्ताह में करीब 30 हजार रुपये की कमाई की थी। कुछ विवरणों में शुरुआती दस दिनों की कमाई 32 हजार रुपये बताई गई है।

आज जब बड़े बजट की फिल्मों के बीच प्रतिस्पर्धा है, तब ‘लंका दहन’ भारतीय सिनेमा के उस शुरुआती दौर की याद दिलाती है, जब सीमित साधनों और मजबूत कहानी के दम पर फिल्में इतिहास रचती थीं। दादा साहेब फाल्के की यह कोशिश भारतीय फिल्म जगत के इतिहास में हमेशा याद रखी जाएगी।

Edited By: Jagdeep

खबरें और भी हैं

महज 15 हजार रुपये में बनी थी रामायण पर आधारित पहली भारतीय फिल्म ‘लंका दहन’, एक ही कलाकार ने निभाए थे राम और सीता के किरदार

टाप न्यूज

महज 15 हजार रुपये में बनी थी रामायण पर आधारित पहली भारतीय फिल्म ‘लंका दहन’, एक ही कलाकार ने निभाए थे राम और सीता के किरदार

1917 में दादा साहेब फाल्के ने मूक फिल्म के जरिए पर्दे पर उतारी थी रामायण की कहानी, दर्शकों के बीच...
स्पेशल खबरें  बालीवुड 
महज 15 हजार रुपये में बनी थी रामायण पर आधारित पहली भारतीय फिल्म ‘लंका दहन’, एक ही कलाकार ने निभाए थे राम और सीता के किरदार

पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज मार्कंडेय काटजू का चुनावी व्यवस्था पर सवाल, बोले– जिंदगी में कभी वोट नहीं दिया और न कभी दूंगा

जाति और धर्म के आधार पर मतदान करने वालों पर की तीखी टिप्पणी, चुनावी व्यवस्था को बताया पागलपन
देश विदेश  नई दिल्ली  
पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज मार्कंडेय काटजू का चुनावी व्यवस्था पर सवाल, बोले– जिंदगी में कभी वोट नहीं दिया और न कभी दूंगा

अभिषेक शर्मा फिर बने दुनिया के नंबर-1 टी20 अंतरराष्ट्रीय बल्लेबाज

न्यूजीलैंड के खिलाफ 38 गेंदों में 113 रन की तूफानी पारी का मिला इनाम, ईशान किशन को छोड़ा पीछे  
देश विदेश  स्पोर्ट्स 
अभिषेक शर्मा फिर बने दुनिया के नंबर-1 टी20 अंतरराष्ट्रीय बल्लेबाज

21 साल में 25 तबादले! IAS तुकाराम मुंढे बोले—‘अपने बच्चों को कभी IAS नहीं बनने दूंगा’, बताई इसकी वजह

बार-बार तबादलों से परिवार और बच्चों की जिंदगी होती है प्रभावित, पढ़ाई से लेकर दोस्तों तक छूट जाते हैं पुराने...
स्पेशल खबरें  देश विदेश 
21 साल में 25 तबादले! IAS तुकाराम मुंढे बोले—‘अपने बच्चों को कभी IAS नहीं बनने दूंगा’, बताई इसकी वजह

बिजनेस

Copyright (c) Jangatha Times All Rights Reserved.
Powered By Vedanta Software