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होशियारपुर में अवैध खनन का बड़ा मामला: 110 फुट गहरे गड्ढे, 31 में से 26 स्टोन क्रशर चालू
राज्य के दावे और जमीनी स्थिति में अंतर आने के बाद सीबीआई की प्रारंभिक जांच में सामने आए अहम तथ्य
होशियारपुर। पंजाब के होशियारपुर जिले में कथित बड़े पैमाने पर अवैध खनन का मामला सामने आने के बाद जांच तेज हो गई है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की प्रारंभिक जांच में जिले में खनन गतिविधियों को लेकर कई अहम सवाल उठे हैं। जांच का मुख्य आधार सरकारी दावों और मौके पर सामने आई स्थिति के बीच कथित अंतर है।
रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब सरकार ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट को बताया था कि राज्य में कोई भी स्वीकृत खनन स्थल चालू नहीं था। दूसरी ओर, होशियारपुर जिले के 31 पंजीकृत स्टोन क्रशरों में से 26 के चालू होने की जानकारी सामने आई। इस अंतर ने जिले में खनन गतिविधियों, उनकी वैधता और संबंधित विभागों की निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
110 फुट तक गहरे गड्ढों का मामला
प्रारंभिक जांच में खनन क्षेत्रों में लगभग 110 फुट तक गहरे गड्ढे होने की बात भी सामने आई है। इतनी गहराई तक खुदाई होने से पर्यावरण, भूमि की स्थिति और आसपास के क्षेत्रों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंता बढ़ गई है। जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित स्थानों पर खनन की अनुमति थी या नहीं और यदि अनुमति थी, तो क्या निर्धारित नियमों का पालन किया गया।
डीएलएसए की रिपोर्ट से जांच को मिला आधार
इस मामले में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) के निष्कर्ष महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। इन निष्कर्षों के आधार पर खनन गतिविधियों की वास्तविक स्थिति और सरकारी रिकॉर्ड के बीच अंतर की जांच का रास्ता खुला। इसके बाद सीबीआई की प्रारंभिक जांच में स्टोन क्रशरों के संचालन और कथित अवैध खनन से जुड़े पहलुओं पर ध्यान केंद्रित हुआ।
कई सवालों के जवाब तलाशना जरूरी
इस मामले में प्रमुख सवाल यह हैं कि जब स्वीकृत खनन स्थलों के चालू नहीं होने की जानकारी अदालत में दी गई थी, तो 26 स्टोन क्रशर किस आधार पर काम कर रहे थे? क्या इन क्रशरों को खनिज की आपूर्ति वैध खनन स्थलों से हो रही थी? क्या संबंधित विभागों ने खनन नियमों और पर्यावरण संबंधी शर्तों की नियमित जांच की थी?
इन सवालों के जवाब जांच आगे बढ़ने के साथ सामने आ सकते हैं। फिलहाल प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। मामले में जिम्मेदारी तय करने के लिए संबंधित रिकॉर्ड, अनुमति पत्रों और मौके की स्थिति का सत्यापन जरूरी होगा।

