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कंबल, चादर और तकिए की चोरी से रेलवे को 100 करोड़ से ज्यादा का चूना! आखिर किस डिवीजन में सबसे ज्यादा गायब हुआ सामान?
जनगाथा टाइम्स विशेष रिपोर्ट ।
भारतीय रेलवे की एसी कोचों में यात्रियों की सुविधा के लिए दिए जाने वाले कंबल, बेडशीट, तकिए और तौलिये अब सफर के बाद रेलवे के स्टोर की बजाय कई यात्रियों के घरों तक पहुंच रहे हैं। सूचना के अधिकार (RTI) से सामने आए आंकड़ों ने चौंकाने वाली तस्वीर पेश की है। पिछले चार वर्षों में रेलवे को लिनेन (कंबल, चादर, तकिया, तौलिया आदि) की चोरी से 100 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है।
रिपोर्ट के अनुसार, सबसे अधिक चोरी बेडशीट और तौलियों की हुई है। इनके बाद तकिए, तकिए के कवर और कंबलों का नंबर आता है। कई मामलों में यात्रियों द्वारा ट्रेन से उतरते समय रेलवे का लिनेन अपने सामान में रखकर ले जाने की घटनाएं सामने आई हैं।
दक्षिण भारत के रेलवे क्षेत्रों में चोरी के मामले सबसे ज्यादा दर्ज किए गए हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार पालक्काड डिवीजन में एक वर्ष के दौरान ही 1,129 बेडशीट, 335 पिलो कवर, 138 तकिए और 129 कंबल गायब मिले, जिससे लाखों रुपये का नुकसान हुआ। वहीं पहले के रेलवे आंकड़ों में सदर्न रेलवे जोन को लिनेन चोरी के मामलों में सबसे अधिक प्रभावित बताया गया था।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि एसी कोचों में हर यात्रा के बाद लिनेन की गिनती की जाती है। कमी मिलने पर इसकी रिपोर्ट तैयार होती है और कई मामलों में ठेकेदारों के भुगतान से राशि भी काटी जाती है। चोरी रोकने के लिए रेलवे सुरक्षा बल (RPF) निगरानी बढ़ा रहा है तथा रेलवे संपत्ति की चोरी करने वालों के खिलाफ रेलवे प्रॉपर्टी (अनलॉफुल पजेशन) एक्ट के तहत कार्रवाई की जाती है। (
यह सवाल भी उठ रहा है कि जिन यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए रेलवे करोड़ों रुपये खर्च करता है, उन्हीं सुविधाओं की चोरी अंततः आम यात्रियों की सेवा और सरकारी खजाने दोनों पर बोझ बन रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सख्त कार्रवाई ही नहीं, बल्कि यात्रियों में सार्वजनिक संपत्ति के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी उतना ही जरूरी है।
Source : The Indian Express

