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लद्दाख में हिंसा: केंद्र ने सोनम वांगचुक को ज़िम्मेदार ठहराया
नेशनल डेस्क .
लेह, लद्दाख — लद्दाख में मंगलवार को हुए प्रदर्शन हिंसा की पृष्ठभूमि में केंद्र सरकार ने पर्यावरणविद् व सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पर आरोप लगाया है कि उन्होंने “जेन-जी क्रांति” का ज़िक्र कर युवाओं को भड़काया। गृह मंत्रालय ने कहा कि वांगचुक के कथित रूप से провокатив बयानों ने प्रदर्शनकारियों को उकसाया, जिसके बाद स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। Reuters+3Hindustan Times+3mint+3
🔍 क्या हुआ?
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प्रदर्शन का मूल कारण था लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देना और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग।
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वांगचुक ने 10 सितंबर से भूख हड़ताल शुरू की थी, लेकिन हिंसा भड़कने के बाद उन्होंने इसे तोड़ दिया।
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गृह मंत्रालय की ओर से कहा गया कि 24 सितंबर सुबह करीब 11:30 बजे, वांगचुक के भाषणों से प्रेरित भीड़ ने पार्टी कार्यालय और सरकारी कार्यालय पर हमला किया, सुरक्षा बलों से भिड़ी, वाहनों को आग लगाई तथा तोड़फोड़ की।
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बाद में सुरक्षा बलों को आत्मरक्षा में कार्रवाई करनी पड़ी — इसके दौरान गोलीबारी हुई और चार लोगों की मौत हुई।
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कम से कम 50 से ज़्यादा लोग गिरफ्तार किए गए हैं और कई घायल हुए। AP News+3Reuters+3The Times of India+3
🧩 केंद्र का आरोप और विवाद
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केंद्र का कहना है कि वांगचुक ने “provocative statements (भड़काऊ बयानों)” देकर भीड़ को दिशा दी।
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इसके अलावा, सरकार ने यह आरोप लगाया कि वांगchuk ने आंदोलन स्थल छोड़ दिया और शांत करने का प्रयास नहीं किया।
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वांगchuk की संस्था Himalayan Institute of Alternatives, Ladakh (HIAL) पर विदेशी फंडिंग (FCRA) नियमों के उल्लंघन की जांच शुरू की गई है।
🧭 प्रतिक्रियाएँ एवं चुनौतियाँ
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वांगचुक ने खुद आरोपों का खंडन करते हुए कहा है कि यह आंदोलन स्थानीय और स्वाभाविक था और उन्होंने कभी हिंसा का आह्वान नहीं किया।
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क्षेत्रीय संगठनों जैसे लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) ने भी इस आंदोलन का नेतृत्व किया है।
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असलियत यह है कि लद्दाख की मांगें—राज्य दर्जा, छठी अनुसूची, नौकरियों में आरक्षण आदि—काफी समय से चर्चा में थी।
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हिंसा की विलंब का सवाल उठता है—क्यों अचानक प्रदर्शन चरम पर पहुंच गया? इसके पीछे राजनीतिक रणनीति या पूर्व योजना का शक खड़ा हो रहा है।
📰 निष्कर्ष
लद्दाख में उत्पन्न यह हिंसा अब केवल प्रदर्शन नहीं रह गई, बल्कि राजनीतिक युद्ध का एक रूप बन गई है — जिसमें सरकार ने प्रमुख आंदोलन-नेता सोनम वांगचुक को ज़िम्मेदार ठहराया है। अब देखते हैं कि वांगchुक कोर्ट या सार्वजनिक बहस में कैसे मुक़ाबला करते हैं, और केंद्र क्या कदम उठाता है।

