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कुछ लोगों को ज़्यादा ठंड लगती है, कुछ को कम — आखिर क्यों ?
— स्वास्थ्य डेस्क
जैसे ही सर्दियों का मौसम शुरू होता है, एक सवाल अक्सर सुनने को मिलता है—“आपको इतनी ठंड लग रही है? मुझे तो बिल्कुल नहीं!”
असल में ठंड लगने का अहसास सिर्फ मौसम पर निर्भर नहीं करता, बल्कि यह शरीर की बनावट, सेहत, उम्र और जीवनशैली से गहराई से जुड़ा होता है।
1. शरीर की चर्बी (Body Fat)
जिन लोगों के शरीर में प्राकृतिक चर्बी अधिक होती है, उन्हें ठंड कम महसूस होती है। चर्बी शरीर के लिए इन्सुलेशन का काम करती है, जबकि दुबले-पतले लोगों को ठंड जल्दी लगती है।
2. मेटाबॉलिज़्म की गति
तेज़ मेटाबॉलिज़्म वाले शरीर अधिक गर्मी पैदा करते हैं। जिनका मेटाबॉलिज़्म धीमा होता है, उन्हें ठंड ज़्यादा महसूस होती है।
3. खून का संचार (Blood Circulation)
अगर हाथ-पैरों में खून का संचार ठीक से नहीं होता तो ठंड ज्यादा लगती है। इसलिए कई लोगों को खासकर पैरों और उंगलियों में ठंड महसूस होती है।
4. उम्र का असर
बुज़ुर्गों और बच्चों को ठंड ज़्यादा लगती है। उम्र बढ़ने के साथ शरीर की तापमान नियंत्रित करने की क्षमता कमजोर हो जाती है।
5. हार्मोनल कारण
थायरॉयड की कमी, एनीमिया या हार्मोनल असंतुलन भी ठंड ज़्यादा लगने का कारण बन सकता है। महिलाओं में यह समस्या अपेक्षाकृत अधिक देखी जाती है।
6. मानसिक स्थिति और आदतें
तनाव, चिंता और नींद की कमी से भी ठंड का एहसास बढ़ सकता है। वहीं जो लोग नियमित व्यायाम करते हैं, उन्हें ठंड कम लगती है।
7. खान-पान का प्रभाव
पोषक तत्वों की कमी, कम खाना या लंबे समय तक खाली पेट रहना भी शरीर की गर्मी कम कर देता है।
विशेषज्ञों की सलाह
यदि किसी व्यक्ति को सामान्य से बहुत अधिक ठंड लगती है, हाथ-पैर सुन्न रहते हैं या लगातार थकान महसूस होती है, तो चिकित्सकीय जांच कराना ज़रूरी है।
निष्कर्ष
ठंड लगना केवल मौसम की बात नहीं, बल्कि शरीर के अंदर चल रही प्रक्रियाओं का संकेत है। सही खान-पान, नियमित व्यायाम और संतुलित दिनचर्या से इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

