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बांके बिहारी मंदिर विवादः पुलिस व प्रशासन की साजिश का पर्दाफाश !” “पहले बदनामी...फिर कब्जा
नेशनल डेस्क ।
मथुराः दुनिया भर के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बांके बिहारी मंदिर इन दिनों बड़े विवाद में घिर गया है। मंदिर को लेकर गोस्वामी समाज और प्रशासन के बीच टकराव अब खुलकर सामने आ चुका है। यह मामला अब सिर्फ एक धार्मिक विवाद नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और सरकारी नियंत्रण की लड़ाई बन गया है।
गोस्वामी समाज ने आरोप लगाया है कि प्रशासन ने उन्हें जानबूझकर नजरबंद किया। उनका कहना है कि Yogi Adityanath के मथुरा दौरे से पहले उनके घरों के बाहर पुलिस तैनात कर दी गई, ताकि वे बाहर निकलकर अपनी समस्याएं सीधे मुख्यमंत्री तक न पहुंचा सकें। कई परिवारों का दावा है कि उन्हें जबरन घरों में ही रोककर रखा गया।
इसके अलावा, गोस्वामी समाज ने एक और गंभीर आरोप लगाया है कि मंदिर के अंदर माहौल खराब करने की साजिश रची जा सकती है। उनके अनुसार, सिविल ड्रेस में लोगों को मंदिर में भेजकर जानबूझकर झगड़े कराए जा सकते हैं। फिर इन घटनाओं का दोष सेवायत गोस्वामियों पर डालकर उनकी छवि खराब की जा सकती है, ताकि यह दिखाया जा सके कि वे मंदिर का सही प्रबंधन नहीं कर पा रहे। हालांकि इन आरोपों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
गोस्वामी समाज का यह भी कहना है कि जो सेवायत कॉरिडोर प्रोजेक्ट और प्रशासनिक फैसलों का विरोध कर रहे हैं, उन्हें खास तौर पर निशाना बनाया जा रहा है। उन पर दबाव डाला जा रहा है और उन्हें चुप रहने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
इस विवाद में 7 मार्च की घटना भी अहम मानी जा रही है। गोस्वामी समाज के अनुसार, उस दिन भी उन्हें नजरबंद किया गया था और मंदिर में हंगामा हुआ था। प्रशासन और सेवायतों के बीच टकराव सामने आया था। अब समाज का कहना है कि यह कोई एक बार की घटना नहीं, बल्कि लगातार दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
पूरे विवाद की जड़ कॉरिडोर प्रोजेक्ट है। सरकार का कहना है कि बांके बिहारी मंदिर में हर साल लाखों श्रद्धालु आते हैं और कई बार भीड़ इतनी बढ़ जाती है कि हादसे का खतरा बन जाता है। इसी वजह से मंदिर के आसपास का क्षेत्र विकसित करने, रास्तों को चौड़ा करने और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कॉरिडोर योजना बनाई गई है। सरकार इसे श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए जरूरी कदम बता रही है।
वहीं, गोस्वामी समाज इस प्रोजेक्ट का विरोध कर रहा है। उनका कहना है कि कॉरिडोर के नाम पर मंदिर की पारंपरिक व्यवस्था को खत्म किया जा सकता है। उनका आरोप है कि उनके सदियों पुराने अधिकारों में हस्तक्षेप किया जा रहा है और धीरे-धीरे मंदिर का नियंत्रण प्रशासन के हाथों में जा सकता है। इसी कारण वे इसे केवल विकास नहीं, बल्कि नियंत्रण की कोशिश मान रहे हैं।
फिलहाल यह विवाद “परंपरा बनाम प्रशासन” की लड़ाई बन गया है। सरकार चाहती है कि मंदिर का प्रबंधन एक व्यवस्थित और आधुनिक प्रणाली के तहत चले, जबकि गोस्वामी समाज पारंपरिक तरीके से ही व्यवस्था बनाए रखना चाहता है। इसी टकराव के चलते हाई पावर कमेटी भी विवाद के केंद्र में आ गई है, जिस पर गोस्वामी समाज उनकी अनदेखी का आरोप लगा रहा है।
इस बीच, गोस्वामी समाज के अंदर सेवायतों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। उन्हें कहा गया है कि किसी भी उकसावे में न आएं, मंदिर में किसी भी तरह का झगड़ा न करें और हर संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखें। साफ तौर पर इसे एक संभावित “ट्रैप” बताया जा रहा है, जिसमें उन्हें फंसाया जा सकता है।

