नेशनल डेस्क।
भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक ढांचे में बदलाव करते हुए नितिन नबीन को अहम जिम्मेदारी सौंपी है। बीजेपी के गठन के करीब दो महीने बाद जन्मे नितिन नबीन के हाथों में अब 45 वर्ष से अधिक पुराने राजनीतिक दल की कमान आई है। इसे पार्टी में पीढ़ीगत बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है, लेकिन इसके साथ ही उनके सामने कई बड़ी चुनौतियां भी जुड़ी हुई हैं।
संगठनात्मक संतुलन बनाए रखना
बीजेपी देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टियों में शामिल है, जहां वरिष्ठ नेताओं और युवा कार्यकर्ताओं दोनों की मजबूत मौजूदगी है। ऐसे में अनुभव और युवाओं की ऊर्जा के बीच संतुलन बनाए रखना नितिन नबीन की प्रमुख चुनौती होगी।
जमीनी कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखना
पार्टी की ताकत उसका मजबूत बूथ लेवल संगठन रहा है। बदलते राजनीतिक हालात और चुनावी रणनीतियों के बीच जमीनी कार्यकर्ताओं को लगातार सक्रिय और प्रेरित रखना अहम माना जा रहा है।
विपक्ष की रणनीति से निपटना
देश की राजनीति में विपक्षी दल नए मुद्दों और गठबंधनों के जरिए बीजेपी को चुनौती देने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में संगठन को मजबूत बनाए रखते हुए विपक्ष की रणनीति का जवाब देना बड़ी जिम्मेदारी होगी।
युवा और नए मतदाताओं से जुड़ाव
देश में युवा मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। शिक्षा, रोजगार और सोशल मीडिया से जुड़े मुद्दों पर युवाओं से संवाद स्थापित करना और उन्हें पार्टी से जोड़ना संगठन के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विचारधारा और समन्वय
बीजेपी की राजनीति उसकी विचारधारा पर आधारित रही है। बदलते समय में पार्टी की मूल विचारधारा को बनाए रखते हुए सामाजिक और राजनीतिक संतुलन साधना भी नितिन नबीन के सामने एक बड़ी चुनौती होगी।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, नितिन नबीन के नेतृत्व में पार्टी के संगठनात्मक फैसले आने वाले समय में बीजेपी की दिशा और रणनीति को प्रभावित कर सकते हैं।

