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भारत बनाम चीन: एशिया के कंडोम मार्केट की बाज़ी किसके हाथ?
- थाईलैंड-मलेशिया बने एक्सपोर्ट के बॉस
इंटरनेशनल डेस्क ।
बीजिंग।
एशिया का कंडोम मार्केट अगले दशक में तेज़ी से बढ़ने वाला है। इंडेक्स बॉक्स की ताज़ा स्टडी के मुताबिक 2035 तक यह मार्केट 19 अरब यूनिट्स और 405 मिलियन डॉलर के स्तर तक पहुँच सकता है।
कंडोम का सफर: झिझक से ज़रूरत तक
हज़ारों साल पहले प्राचीन मिस्र और रोम में बकरियों व भेड़ों की आंतों से बने प्रोटेक्शन इस्तेमाल किए जाते थे। 1920 के दशक में लेटेक्स के आविष्कार ने कंडोम को सुरक्षित, टिकाऊ और सुलभ बना दिया। आज यह सिर्फ गर्भनिरोधक नहीं बल्कि यौन संचारित रोगों से बचाव और यौन स्वतंत्रता का भी प्रमुख साधन है।
2024 में बाज़ार का हाल
2022 में एशिया में 32 अरब यूनिट्स का उत्पादन हुआ।
2024 में यह घटकर 26 अरब यूनिट्स और 292 मिलियन डॉलर की वैल्यू पर आ गया।
महामारी के बाद की आर्थिक सुस्ती को इसका कारण माना जा रहा है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार गिरावट अस्थायी है।
सबसे बड़े खिलाड़ी
चीन: 5.8 अरब यूनिट्स (42% हिस्सा) – एशिया का सबसे बड़ा उपभोक्ता।
भारत: 2.4 अरब यूनिट्स – दूसरा स्थान।
तुर्की: 701 मिलियन यूनिट्स – तीसरा स्थान।
दिलचस्प है कि कुल खपत में चीन आगे है लेकिन प्रति व्यक्ति खपत में UAE पहले नंबर पर है – वहां हर शख्स औसतन 31 यूनिट्स सालाना इस्तेमाल करता है।
कीमतें और एक्सपोर्ट
औसत इम्पोर्ट कीमत 31 डॉलर प्रति हज़ार यूनिट्स।
वियतनाम (48 डॉलर) सबसे महंगा और मलेशिया (9.6 डॉलर) सबसे सस्ता।
थाईलैंड, मलेशिया और चीन मिलकर एशिया के 95% निर्यात पर कब्जा किए हुए हैं।
मलेशिया दुनिया का सबसे बड़ा कंडोम उत्पादक और निर्यातक है।
आगे का ट्रेंड
रिपोर्ट के मुताबिक 2024 से 2035 तक एशियाई कंडोम मार्केट 3% की औसत वार्षिक दर से बढ़ेगा। यानी अगले 10 वर्षों में यह न सिर्फ खपत और उत्पादन में दोगुना होगा बल्कि लाइफस्टाइल और हेल्थ इंडस्ट्री का बड़ा सेगमेंट बन जाएगा।
अब सबकी निगाहें इसी पर हैं कि भारत और चीन की इस खपत दौड़ में आने वाले दशक में कौन नंबर वन बनेगा – क्या चीन अपनी आबादी और मौजूदा खपत से आगे रहेगा या भारत तेज़ी से बढ़ते शहरीकरण और जागरूकता के दम पर बाज़ी पलटेगा?

