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डिजिटल डिक्टेटरशिप: एक क्लिक से आपकी आज़ादी खतरे में

नेशनल डेस्क ।
नई दिल्ली: जब सत्ता के पास आपकी पूरी डिजिटल प्रोफाइल हो, तो वह आपके अधिकारों को नियंत्रित कर सकती है। शुरुआत सुरक्षा और प्रशासनिक दक्षता से होती है, लेकिन अंततः यह राजनीतिक लाभ के लिए भी इस्तेमाल हो सकता है। इंटरनेट और सोशल मीडिया इसका सबसे तेज माध्यम हैं।
भारत में प्रतिरोध की संभावना है, लेकिन समय तेजी से कम होता जा रहा है। अगले कुछ सालों में नेटवर्क पूरी तरह एकीकृत हो जाएगा, और हर गतिविधि का रियल-टाइम विश्लेषण संभव होगा। एआई का पूर्वानुमान करने का गुण इसे और खतरनाक बनाता है, क्योंकि यह न केवल किए गए काम बल्कि भविष्य की संभावनाओं को भी आंक सकता है।
सबसे जरूरी है कि डेटा का स्वामित्व नागरिक के पास हो। आपकी जानकारी पर आपका संवैधानिक अधिकार होना चाहिए। डेटा बदलने या डिलीट करने के लिए स्वतंत्र न्यायिक प्रक्रिया अनिवार्य हो। निगरानी पारदर्शी और जवाबदेह हो, और नागरिकों को यह जानने का अधिकार मिले कि उनके बारे में कौन-सा डेटा इकट्ठा हो रहा है।
अगर अभी कदम नहीं उठाए गए, तो हम ऐसे समाज में पहुँच जाएंगे जहाँ आज़ादी केवल डेटाबेस में दर्ज होगी। एक क्लिक से आपका अस्तित्व मिट सकता है। यह डेटा डिक्टेटरशिप का युग है, और इसे रोकने का समय तेजी से कम होता जा रहा है।
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