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शर्मनाक : बांके बिहारी मंदिर में सेवायतों से बदसलूकी, मुख्य गोस्वामी के कपड़े फाड़े गए, प्रशासनिक कार्रवाई से भक्तों में आक्रोश
नेशनल डेस्क ।
वृंदावन :
विश्वविख्यात श्री बांके बिहारी मंदिर में रविवार को उस समय हंगामा खड़ा हो गया, जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दर्शन कार्यक्रम से पहले प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा मंदिर के सेवायत गोस्वामियों के साथ कथित रूप से अभद्र व्यवहार किया गया। आरोप है कि अधिकारियों ने मुख्य सेवायत अनंत (जौनी) गोस्वामी के साथ धक्का-मुक्की की और विरोध करने पर उनके कपड़े तक फाड़ दिए।
प्रत्यक्षदर्शियों और सेवायत समाज के अनुसार, प्रशासनिक अधिकारी अचानक मंदिर परिसर में पहुंचे और सुरक्षा का हवाला देते हुए सेवायत गोस्वामियों को जबरन बाहर निकालने लगे। जब गोस्वामियों ने इसका विरोध किया तो स्थिति बिगड़ गई। आरोप है कि कई सेवायतों को एक कमरे में बंद करने की कोशिश भी की गई, जबकि महिलाओं और परिजनों के साथ भी कठोर व्यवहार हुआ।
सेवायत रजत गोस्वामी ने बताया कि सभी गोस्वामी प्रतिदिन की तरह मंदिर सेवा के लिए उपस्थित थे और मुख्यमंत्री से सामान्य शिष्टाचार के तहत मिलना चाहते थे। न तो कोई ज्ञापन सौंपने की योजना थी और न ही किसी प्रकार के विरोध का कार्यक्रम। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से जिस तरह का व्यवहार किया गया, वह अत्यंत अपमानजनक और पीड़ादायक है।
👉 कॉरिडोर विवाद से जुड़ा मामला?
सेवायत समाज का मानना है कि यह घटना बांके बिहारी मंदिर कॉरिडोर परियोजना से सीधे तौर पर जुड़ी हुई है। गोस्वामी समाज लंबे समय से इस प्रस्तावित कॉरिडोर का विरोध करता आ रहा है। उनका कहना है कि यह परियोजना मंदिर की सदियों पुरानी निज सेवा परंपरा, सेवायत अधिकारों और भगवान बांके बिहारी जी की गोपनीय एवं सहज भक्ति प्रणाली को नुकसान पहुंचाएगी।सेवायतों का आरोप है कि प्रशासन लगातार दबाव बनाकर इस योजना को बिना सहमति लागू करना चाहता है और रविवार की घटना उसी दबाव की एक कड़ी है।
👉 देश-विदेश के भक्तों में गुस्सा
इस कथित बदसलूकी की खबर ने न केवल भारत, बल्कि दुनिया भर के कृष्ण भक्तों को झकझोर कर रख दिया है। सोशल मीडिया, अंतरराष्ट्रीय भक्त समूहों और मंदिर समर्थक संगठनों में इसे “आस्था पर प्रशासनिक हमला” बताया जा रहा है। न्यूयॉर्क में रहने वाले एक कृष्ण भक्त ने भावुक संदेश में कहा, “हम हजारों मील दूर रहकर भी बांके बिहारी जी को अपने हृदय में बसाए हुए हैं। अगर वृंदावन में सेवायत सुरक्षित नहीं हैं, तो हमारी भक्ति भी असहाय हो जाती है।”

यूरोप और ब्रिटेन के कई भक्त संगठनों ने सवाल उठाया है कि क्या विकास के नाम पर मंदिर की आत्मा, परंपरा और गोस्वामी अधिकारों को कुचला जा रहा है। उनका कहना है कि विकास आवश्यक है, लेकिन वह आस्था और परंपरा को रौंदकर नहीं होना चाहिए।ब्रिटेन स्थित एक भक्त समूह ने बयान में कहा, “जब गोस्वामी रोते हैं, तो वृंदावन की गलियां रोती हैं और जब वृंदावन रोता है, तो दुनिया का हर कृष्ण भक्त आहत होता है।”
👉बड़ा सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह गंभीर प्रश्न खड़ा कर दिया है कि क्या आधुनिक प्रशासनिक व्यवस्था भारत की आध्यात्मिक विरासत की संवेदनशीलता को समझ पा रही है या नहीं। भक्तों और सेवायत समाज ने एक स्वर में मांग की है कि बांके बिहारी मंदिर में संवाद, सम्मान और परंपरा को प्राथमिकता दी जाए न कि बल, भय और नियंत्रण को।

