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धर्मस्थल सामूहिक दफन कांड: कर्नाटक की धरती से उठा रहस्य, SIT की गिरफ्त में पूर्व सफाई कर्मचारी से खुल सकते हैं बड़े

नेशनल डेस्क
धर्मस्थल (कर्नाटक)। कर्नाटक के धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से प्रतिष्ठित स्थल धर्मस्थल में इन दिनों एक ऐसा मामला सुर्खियों में है जिसने पूरे राज्य को हिलाकर रख दिया है। सामूहिक दफन कांड के नाम से चर्चित यह मामला तब सामने आया जब एक पूर्व सफाई कर्मचारी ने दावा किया कि उसे वर्षों तक दबाव डालकर हत्या के शिकार लोगों के शव गुपचुप तरीके से दफनाने पर मजबूर किया गया। अब विशेष जांच दल (SIT) ने इस व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया है और पूछताछ का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।
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पवित्र स्थल से अपराध की गंध
धर्मस्थल, जिसे कर्नाटक में धार्मिक आस्था और सामाजिक सेवा के केंद्र के रूप में जाना जाता है, आज एक गहरे अपराध के आरोपों में घिरा हुआ है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह खबर अविश्वसनीय से कम नहीं है। लेकिन SIT के हाथ लगी शुरुआती जानकारी ने साबित कर दिया है कि मामला केवल अफवाहों का नहीं, बल्कि संगठित अपराध की ओर इशारा करता है।
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कबूलनामे ने चौंकाया
गिरफ्तार सफाई कर्मचारी ने पूछताछ के दौरान माना कि उसे स्थानीय प्रभावशाली लोगों ने वर्षों तक धमकाकर शव दफनाने पर मजबूर किया। उसका दावा है कि यह काम एक सुनियोजित तरीके से होता रहा और वह केवल आदेशों का पालन करता रहा। उसने यह भी संकेत दिए हैं कि इसमें कुछ स्थानीय प्रभावशाली लोग शामिल थे जो आज भी स्वतंत्र घूम रहे हैं।
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SIT की गहन जांच
राज्य सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत SIT का गठन किया। जांच टीम ने आरोपी को हिरासत में लेकर लगातार कई घंटे पूछताछ की। सूत्र बताते हैं कि आरोपी ने कई अहम नाम और स्थानों का जिक्र किया है। SIT अब उन संभावित जगहों की तलाश कर रही है जहां कथित तौर पर शव दफनाए गए थे।
एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, “यह मामला बेहद संवेदनशील है। हमारे सामने चुनौती केवल अपराधियों तक पहुँचना नहीं, बल्कि समाज में फैले भय और अविश्वास को दूर करना भी है।”
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रहस्यमयी गुमशुदगियों से कनेक्शन
धर्मस्थल और आसपास के इलाकों से बीते वर्षों में कई गुमशुदगी की घटनाएँ सामने आई थीं। स्थानीय पुलिस अक्सर इन्हें व्यक्तिगत विवाद या पलायन के मामले बताकर फाइलें बंद कर देती थी। लेकिन अब जब सामूहिक दफन का मामला सामने आया है तो उन पुराने केसों की फाइलें फिर से खोली जा रही हैं। जांचकर्ताओं का मानना है कि इन गुमशुदगियों का सीधा संबंध इस कांड से हो सकता है।
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समाज में आक्रोश और भय
स्थानीय लोगों का कहना है कि धर्मस्थल जैसे धार्मिक स्थल से इस तरह की खबर सामने आना बेहद शर्मनाक है। लोगों में भय व्याप्त है कि उनके अपने गुमशुदा रिश्तेदार कहीं इसी कांड का हिस्सा तो नहीं बन गए। कई सामाजिक संगठनों ने न्यायिक जांच की मांग की है और कहा है कि SIT को राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव से मुक्त रखकर पूरी सच्चाई सामने लानी चाहिए।
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विशेषज्ञों की राय
क्रिमिनोलॉजिस्ट डॉ. अर्चना देव का कहना है कि “भारत में इस तरह के मामले बेहद दुर्लभ हैं। सामूहिक दफन आम तौर पर युद्ध, आपदा या दंगों से जुड़े होते हैं। लेकिन किसी धार्मिक स्थल के इर्द-गिर्द इस तरह का आरोप लगना न केवल अपराध की गंभीरता दर्शाता है बल्कि सत्ता और अपराध के गठजोड़ की ओर भी इशारा करता है।”
वहीं समाजशास्त्री प्रो. जगदीश हेगड़े का कहना है, “यह घटना समाज में भरोसे के संकट को जन्म देती है। जब धार्मिक स्थल पर इस तरह की आशंकाएँ उठेंगी तो आम जनता का विश्वास हिलना तय है।”
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सरकार की सख्त प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि जांच किसी भी हाल में अधूरी नहीं छोड़ी जाएगी। उन्होंने SIT को पूरी छूट दी है और कहा है कि चाहे कितने भी बड़े नाम इसमें क्यों न शामिल हों, किसी को छोड़ा नहीं जाएगा। सरकार ने संकेत दिए हैं कि अगर जरूरत पड़ी तो केंद्र सरकार की एजेंसियों से भी सहयोग लिया जाएगा।
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मीडिया की पैनी नज़र
कर्नाटक के प्रमुख अख़बारों और टीवी चैनलों ने इस खबर को बड़े पैमाने पर कवर किया है। सोशल मीडिया पर भी इस कांड की चर्चाएँ जोरों पर हैं। #MassBurialCase और #Dharmasthala ट्रेंड कर रहे हैं। लोगों की प्रतिक्रियाएँ गुस्से और हैरानी से भरी हुई हैं।