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क्या है फैटी लिवर? जानिए कारण, प्रकार और खतरे

नई दिल्ली – फैटी लिवर एक आम लेकिन धीरे-धीरे गंभीर होने वाली बीमारी है, जिसमें लिवर की कोशिकाओं में असामान्य रूप से वसा (फैट) जमा हो जाती है। सामान्य रूप से लिवर में थोड़ी मात्रा में फैट मौजूद होता है, लेकिन जब यह कुल लिवर वज़न का 10% या उससे अधिक हो जाता है, तो इसे "फैटी लिवर" कहा जाता है।
🧬 क्यों होता है फैटी लिवर?
फैटी लिवर तब होता है जब शरीर वसा को सही से मेटाबॉलाइज़ नहीं कर पाता और वह लिवर में जमा होने लगती है। ये स्थिति जीवनशैली, खानपान और कुछ विशेष आदतों के कारण उत्पन्न हो सकती है।
🔍 फैटी लिवर के प्रकार:
1️⃣ अल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिज़ीज़ (AFLD)
यदि यह स्थिति अत्यधिक शराब के सेवन के कारण उत्पन्न होती है, तो इसे अल्कोहॉलिक स्टिएटोहेपेटाइटिस कहा जाता है। इसमें लिवर में फैट के साथ-साथ सूजन और कोशिकाओं को नुकसान भी होता है।
2️⃣ नॉन-अल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिज़ीज़ (NAFLD)
जब व्यक्ति शराब का सेवन नहीं करता, लेकिन फिर भी लिवर में फैट जमा होता है, तो इसे नॉन-अल्कोहॉलिक फैटी लिवर कहा जाता है।
अगर इस स्थिति में लिवर में सूजन हो जाए, तो इसे नॉन-अल्कोहॉलिक स्टिएटोहेपेटाइटिस (NASH) कहते हैं।
⚠️ जोखिम और संभावित दिक्कतें:
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लिवर में सूजन (hepatitis)
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लिवर फाइब्रोसिस (scarring)
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सिरोसिस (liver failure तक की स्थिति)
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लिवर कैंसर (गंभीर मामलों में)
ध्यान देने वाली बात यह है कि हर फैटी लिवर केस नुकसानदेह नहीं होता, लेकिन समय पर पहचान और इलाज न होने पर यह गंभीर रूप ले सकता है।
💡 सावधानियां और समाधान:
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नियमित व्यायाम और शारीरिक सक्रियता
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संतुलित और कम फैट वाला आहार
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शराब से पूरी तरह परहेज (विशेषकर AFLD में)
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मधुमेह और हाई कोलेस्ट्रॉल पर नियंत्रण
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नियमित लिवर फंक्शन टेस्ट और डॉक्टर से जांच