सुनील जाखड़ नहीं रखेंगे कांग्रेस से अब संबंध , लेकिन चिंतन शिविर में भी नहीं डालेंगे ‘खलल’

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चंडीगढ़ : पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्‍यक्ष सुनील जाखड़ अब कांग्रेस के साथ संबंध बनाए रखने के मूड में नहीं हैं। लेकिन, कांग्रेस के लिए राहत की बात है कि वह पार्टी के चिंतन शिविर में ‘खलल’ नहीं डालेंगे।

सुनील जाखड़ ने 13 से 15 मई तक राजस्थान के उदयपुर में होने वाली चिंतन शिविर के दौरान कांग्रेस के लिए असहज स्थिति पैदा नहीं करने का फैसला किया है। सुनील जाखड़ ने चिंतन शिविर से पहले कांग्रेस पर सीधा हमला करने का विचार त्याग दिया है। जाखड़ ने पहले 13 मई को उदयपुर में प्रेस कान्फ्रेंस करने का फैसला किया था। इसके लिए बाकायदा फ्लाइट की टिकट भी बुक करवा ली थी लेकिन बाद में उन्होंने फैसला बदल दिया।

जाखड़ के करीबी सूत्रों के अनुसार वह अब कांग्रेस के साथ संबंध नहीं रखना चाहते हैं। इसके साथ ही पार्टी के साथ 50 साल पुराने रिश्तों को ध्यान में रखते हुए वह चिंतन शिविर में कोई खलल भी नहीं डालना चाहते हैं। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस ने जाखड़ को पार्टी का अनुशासन तोड़ने का दोषी करार दिया है।

अनुशासन कमेटी ने जाखड़ को सभी पदों से मुक्त करने व दो साल के लिए निलंबित करने की सिफारिश पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी से की थी। जाखड़ के पास पार्टी का कोई पद नहीं था लेकिन सोनिया गांधी ने अभी तक उन्हें निलंबित भी नहीं किया है। पार्टी द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी करने से खफा जाखड़ ने कांग्रेस छोड़ने का मन बना लिया है। इंतजार केवल इस बात का हो रहा है कि कांग्रेस उन्हें पार्टी निकालती है या वह पार्टी को छोड़ने की घोषणा करते हैं।

हिंदू होने के कारण मुख्यमंत्री की कुर्सी से दूर रहे के बयान के कारण जाखड़ ने कारण बताओ नोटिस को लेकर पार्टी को जवाब देने के लिए चिंतन शिविर के समय का चयन किया था। क्योंकि,  इस दौरान पार्टी के सभी वरिष्ठ नेता मौजूद रहेंगे। जाखड़ चाहते थे कि उन पर लगे अनुशासनहीनता के आरोपों का जवाब वह चिंतन शिविर के दौरान दें।

सूत्र बताते हैं कि जाखड़ ऐसा न करें, इसके लिए कांग्रेस भी उन पर दबाव बना रही थी लेकिन वह मान नहीं रहे थे। हालांकि अंतिम समय पर उन्होंने कांग्रेस पर हमला न करने का फैसला किया है। वहीं जाखड़ का कहना है, ‘मैं फिलहाल इस मामले में कुछ भी नहीं बोल रहा हूं। मेरे ऊपर किसी का कोई दबाव नहीं है। यह फैसला पूर्ण रूप से मेरा है।’

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