लुधियाना में पड़ोसन ने ढ़ाई वर्षीय बच्ची का किया कत्ल

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लुधियाना। नेटवर्क न्यूज़। शिमलापुरी स्थित क्वालिटी चौक के पास साढ़े 8 नंबर गली में पड़ोसन द्वारा हेड कांस्टेबल हरप्रीत सिंह की ढ़ाई वर्षीय बच्ची का कत्ल करने के मामले में सोमवार को दिलरोज कौर का पोस्टमार्टम करवाया गया। उसे आखिरी बार देखने के लिए लोगों को जनसैलाब उमड़ पड़ा। वहीं, आरोपी नीलम को अदालत में पेश कर पुलिस ने दो दिन के रिमांड पर लिया है। जिसमें उससे सारी प्लानिंग के बारे में पड़ताल की जाएगी। सिविल अस्पताल में सुबह ही दिलरोज के शव का पोस्टमार्टम करवाने के लिए परिवार पहुंच गया।

– 15 दिन साजिश रचने के बाद की हत्या फिर पीड़ितों संग बच्ची को ढूंढ़ती रही
– पुलिस ने मामला दर्ज़ कर अगली कार्यवाई शुरू कर दी।

वहां डाॅक्टर गुरविंदर कौर, डाॅ. वरुण सग्गड़ और डाॅ. रिपुदमन ने बोर्ड बनाकर पोस्टमार्टम किया। जिसके बाद पता चला कि बच्ची की मौत सांस रूकने की वजह से हुई है। इसके अलावा उसके माथे पर और सिर के पीछे चोट का निशान हैं। जोकि बच्ची से मारपीट करते या गिरने की वजह से आई होगी। पोस्टमार्टम के बाद शव पीड़ित परिवार को सौंप दिया गया। शिमलापुरी श्मशानघाट में बच्ची का अंतिम संस्कार कर दिया गया। संस्कार के समय परिवार के अलावा मौके पर मौजूद लोग भी अपने आंसू रोक नहीं पाए।

मां बोली, पानी देयो मेरे पुत्त दे फेस ते मिट्टी लग्गी आ साफ करनी

पोस्टमार्टम के बाद जब शव को घर ले जाया गया तो वहां पहले से ही लोगों की भीड़ मौजूद थी। हर तरफ से चीखने-चिल्लाने की आवाजें सुनाई दे रही थी। लेकिन दिलरोज की मां किरण बेसुध थी। जैसे ही बेटी का चेहरा देखा तो जोर-जोर से चिल्लाने लगी। बेटी के चेहरे पर लगी मिट्टी देखकर बोली, कोई पानी दवो मेरे पुत्त दे फेस ते मिट्टी लग्गी आ, ओहनू साफ करना। इसके बाद अपने दुपट्टे को पानी में भिगो कर उससे बेटी का चेहरा साफ करने लगी। फिर रोते-रोते बेटी को गले से लगाकर चीखने लगी।

15 दिन साजिश रचने के बाद की हत्या फिर पीड़ितों संग बच्ची को ढूंढ़ती रही

कंजकों पर दिलरोज को आरोपी नीलम अपने घर लेकर आई थी। उसके पांव छूकर आशीर्वाद दिया और फिर उसे ही मौत के घाट उतार दिया। वो खुद को दिलरोज की मुंहबोली बुआ बताती थी। सूत्रों के मुताबिक पड़ताल में सामने आया कि इस सारी घटना को अंजाम देने के लिए आरोपी नीलम ने करीब 15 दिन पहले प्लानिंग की थी। इसलिए उसने रोज दिलरोज को चाॅकलेट टाफी का बहाना बनाकर अपने साथ ले जाना शुरू कर दिया था, ताकि परिवार में विश्वास बन जाए। उसने तय किया था कि घर खाली करने के आखिरी दिन वो वारदात को अंजाम देगी। सब कुछ प्लानिंग के मुताबिक हुआ। रविवार को दिलरोज माता-पिता के साथ किसी कार्यक्रम में गई थी। वहां से वापस लौटने के बाद घर के बाहर ही खड़ी थी। इस दौरान नीलम उसे लालच देकर अपने साथ ले गई। जिसके बारे में नीलम के बेटे और मोहल्ले के लोगों ने परिवार को बताया। लेकिन जब किरण ने नीलम को फोन किया, तो वो दिलरोज को ले जाने वाली बात से मुकर गई और बोली, वो तो उसे लेकर गई ही नहीं और घर आकर अंजान बनकर पीड़ित परिवार के साथ बच्ची को ढूंढने लगी। लेकिन फुटेज ने खुलासा कर दिया।

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