तीन दिवसीय महाराष्ट्र का 52वां वार्षिक निरंकारी संत समागम सतगुरु माता जी के आर्शीवाद से सम्पन्न

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    होशियारपुर  ( रुपिंदर ): महाराष्ट्र का 52वां वार्षिक निरंकारी संत समागम खारघर, नवी मुंबई में संपन्न हुआ ।  सिडको के विशाल मैदानों में लाखों की संख्या में भक्तजन अपन भक्तिमय एवं आध्यात्मिक खुशबू फैलाते हुए उमड़ समागम में शामिल हुए।   तीन दिवसीय समागम सतगुरु माता सुदीक्षा जी के समागम के मुख्य प्रवेश द्वार पर पधारने से इस का शुभारंभ हुआ।  जुलाई, 2018 को मिशन की बागड़ोर सम्भालने के पश्चात सतगुरु माता जी के मार्गदर्शन में महाराष्ट्र का यह पहला वार्षिक सन्त समागम था।  इस समागम का मुख्य विषय सतगुरु माता सविंदर जी के जीवन एवं सिखलाईयों से प्रेरणा लेना था। जिनकी चाहत थी कि मिशन का हर अनुयायी ब्रह्मज्ञान से प्रेरित एक रोशन मीनार बनें एवं समाज में आदर्श जीवन की एक मिसाल पेश करें । उक्त जानकारी संत निरंकारी मंडल के मीडिया सहायक मनप्रीत सिंह ने होशियारपुर में देते हुए कहा कि  शोभा यात्र के संपन्नता के साथ ही सत्संग का खुला सत्र आरंभ हुआ ।  खुले सत्र में मुख्य मंच पर विराजमान होते ही सतगुरु  माता सुदीक्षा जी ने मानवता के नाम संदेश देकर समागम का विधिवत प्रारंभ किया । मानवता के नाम अपने संदेश में उन्होंने कहा कि ईश्वर ने एक दूसरे के साथ प्रेम करने के लिए मानव की उत्पित्त की है  जैसे तमाम कमियों के बावजूद ईश्वर हम सबको प्यार करता है । उसी प्रकार कमियों को नज़र अंदाज करते हुए हमें भी एक दूसरे से प्यार करना चाहिए । बेशक हमारे सामने बोली भाषा, संस्कृति एवं प्रान्त की विभिन्नतायें हैं परन्तु ये भिन्नतायें हमारे लिए एक दूसरे से दूरी का कारन नहीं होना चाहिए ।  हमें प्रकृति से सीख लेकर भिन्नताओं को सौंदर्य के रु प में देखना चाहिए जैसे कहीं उँचे उँचे पहाड़ हैं तो कहीं बड़े बड़े मरु स्थल। रंगारंग सेवादल रैली के साथ समागम के दूसरे दिन का आरम्भ हुआ । इस सेवादल रैली में हजारों की संख्या में सेवादल के बहन-भाई विर्दयों में सतगुरु माता जी का आशीर्वाद ग्रहण करने के लिए भाग लिए। ये सेवादल के बहन-भाई मिशन के समस्त कार्यक्र मों एवं देश एवं दूर देशों में होने वाली मिशन की समस्त गतिविधियों में भाग लेते हैं । उन्होंने अपने स्वास्थ्य को ठीक रखने के लिए व्यायाम के महत्व को समझाते हुए कुछ व्यायाम की कला प्रस्तुत की ।
    सेवादल रैली को आशीर्वाद प्रदान करते हुए सतगुरु माता जी ने कहा कि सेवादल के बहन भाई अपने अनुशासन एवं समर्पण के द्वारा न केवल समागमों में बल्कि जहां भी आदेश आ जाता है अपनी सेवायें निभाते हैं ।
    संत निरंकारी मिशन की शिक्षाओं को अपना कर आदमी बेहतर इन्सान बन सकता है । जाति, धर्म पर आधारित भिन्नताओं से ऊपर उठ कर इन्सान मानव जन्म के महत्व को समझ कर मिशन द्वारा फैलाये जा रहे ब्रह्मज्ञान को प्राप्त करके जीवन सफल कर सकता है ।
    उन्होंने आगे कहा कि हम प्राचीन ग्रन्थों एवं दर्शन शास्त्नों को भी पढ़ते हैं परन्तु ब्रह्मज्ञान प्राप्त करके हम उन्हें बेहतर समझ सकते हैं । एकत्व एवं सद्भाव और अनेकता में एकता की शिक्षायें केवल एक नारा ही नहीं है बल्कि हम उन्हें रोजमर्रा के जीवन में अपनाते चले जायें ।
    जीवन के हर कर्म में ब्रह्मज्ञान शामिल करें । यह आपके जीवन को उँचा उठायेगा । यह उस पंछी की तरह है जो दो पंखों की सहायता से उड़ता हुआ आसमान की उँचाईयों को छूता है । ब्रह्मज्ञान से मानव जीवन में करु णा, विनम्रता, विशालता एवं त्याग के भाव जैसे मानवीय गुणों का विकास होता है । जिसके कारण जीवन में रोशनी आती है और वह दूसरों के लिए एक आदर्श बन जाता है ।ब्रह्मज्ञान के द्वारा यह समझ आ जाती है कि ईश्वर हर प्राणी के अंदर आत्मा रु प में विराजमान है 7। इसलिए वह हर प्रकार के भेद भाव से ऊपर उठ कर हर एक से प्रेम और सबका आदर करता है सद्गुरु माता जी ने कहा कि सत्य, शान्ति, प्रेम, विनम्रता एवं भाईचारा संत निरंकारी मिशन की सिखलाई है ।हमारे कर्मों के द्वारा दूसरे ज्यादा प्रभावित होंगे । यदि हमारे कर्म हमारे बोलों के अनुसार नहीं हैं तो हमारे शब्द व्यर्थ हो जायेंगे । यदि हमारे कर्म नकारात्मक हैं तो हमारे सकारात्मक संदेश भी किसी काम के नहीं होंगे

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