मानसून में मंडरा रहा मलेरिया-डेंगू का खतरा

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हैलथ : मलेरिया प्लास्मोडियम प्रजाति के कारण होने वाली एक बहुत ही सामान्य वेक्टर जनित बीमारी है जो मलेरिया परजीवी द्वारा संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से मनुष्यों में फैलती है। मौजूदा आधारित अध्ययनों से पता चलता है कि मानसून के आगमन के साथ ही मलेरिया के मामले बढ़ने लगते हैं। मलेरिया के मामलों में प्रसार और वृद्धि को नियंत्रित करने वाले कारकों में तापमान, सापेक्ष आर्द्रता और बारिश शामिल हैं। मादा एनोफिलीज मच्छर जमा हुए पानी में पनपती है और प्रजनन करती है, जो कंस्ट्रक्शन स्थलों, घरेलू और सार्वजनिक परिवेश में पाई जा सकती है, जहां पानी जमा होता है।बरसात के मौसम के आगमन के साथ, जल जमा होना और जल के ठहराव की घटनाओं में वृद्धि होना तय है, इस प्रकार की हर जगह को मच्छरों के प्रजनन स्थल के रूप में बढ़ावा देना तय है।

किन लोगों को होता है मलेरिया?

सभी आयु वर्ग के लोग मलेरिया से पीड़ित हैं लेकिन गर्भवती महिलाओं और 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों या जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत कम है, उनमें यह अधिक गंभीर रूप से होता है।

मलेरिया के लक्षण

लक्षणों में 101 तक का आवधिक बुखार, पसीना और काँपना, दस्त, मतली, उनींदापन, सिरदर्द, उल्टी, फ्लू जैसे लक्षण, हल्की खांसी और सर्दी शामिल हैं। परजीवियों के आधार पर लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन अधिकतर वे वही रहते हैं।

इससे बचने के लिए ये करें

. आसपास के क्षेत्र में पानी के ठहराव से बचें और जगहों को साफ रखना बहुत जरूरी है।

. ऐसे कपड़े पहनें जो हल्के रंग के हों और जो आपके पूरे शरीर को ढके हों।

. रात को सोते समय कीटनाशक उपचारित मच्छरदानी का प्रयोग करें। यह सबसे महत्वपूर्ण मलेरिया रोधी उपाय है जिसे किया ही जाना चाहिए, जिसमें लार्वा विरोधी उपाय भी शामिल हैं।

. शाम के समय शयनकक्षों पर एरोसोल कीटनाशक का छिड़काव किया जाना चाहिए।

. सार्वजनिक शिक्षा, लोगों में जागरूकता और एहतियाती उपाय और उपलब्ध होने पर टीके का उपयोग करना चाहिए।

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