श्री भगवान परशुराम सेना की तरफ से केशो मंदिर में करवाई जा रही श्री राम कथामृत संपन्न

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    होशियारपुर (रुपिंदर ) श्री भगवान परशुराम सेना की तरफ से जिलाध्यक्ष आशुतोष शर्मा की अध्यक्षता में केशो मंदिर में करवाई जा रही सात दिवसीय श्री राम कथामृत के अंतिम दिन कथा श्रवण करने के लिए भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। श्री भगवान परशुराम सेना द्वारा दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के सहयोग श्री राम कथामृत का आयोजन किया गया था। श्री राम कथा के अंतिम दिन कैबिनेट मंत्री सुंदर शाम अरोड़ा, कांग्रेस के शहरी प्रधान एडवोकेट राकेश मरवाहा विशेष तौर पर शामिल हुए। कथा के अंतिम दिन मुख्य यजमान श्रीमति विजय लक्ष्मी, सुरेश चंद्र शर्मा, ग्रोवर फ्रूट कंपनी से प्रदीप ग्रोवर, सुरिंदर कुमार बिटन और प्रवीन गुप्ता थे। जबकि ज्योति प्रज्जवलित करने की रस्म जिलाध्यक्ष आशुतोष शर्मा, वनीता शर्मा, स्वामी सज्जानानंद जी, गगनदीप सिंह, पार्षद सुधर्षण धीर, श्री राजपूत करणी सेना के महासचिव विनोद ठाकुर, प्रिंस शाम चौरासी, अविनाश राय धुग्गा गढ़दीवाला, कुमार गौरव भार्गव, डा.संजीव बक्शी, अजय शर्मा, अजय मेहता, सोनू जोशी, संदीप गुप्ता, राजा और  राकेश शर्मा ने निभाई।
    श्री राम कथामृत के अंतिम दिवस साध्वी गरिमा भारती ने बताया कि राम राज्य को स्थापित करने के लिए राम को जानना होगा। साध्वी जी ने रामराज्य प्रसंग क ो बड़े ही रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया।  उन्होंने बताया कि मर्यादा पुरूषोत्तम श्री राम के मार्गदर्शन में अयोध्या का राज्य सभी प्रकार से उन्नत था। लेकिन क्या यही राम राज्य की वास्तविक परिभाषा है तो इसका जवाब है नहीं। अगर यही रामराज्य की सही परिभाषा है तो लंका भी तो भौतिक संपत्रता, समृद्वि, ऐश्वर्य, सुव्यवस्थित सेना में अग्रणी थी। परन्तु फि र भी उसे राम राज्य के समतुल्य नहीं कहा जाता क्योंकि लंकावासी मानसिक स्तर पर पूर्णता अविकसित थे। उनके भीतर आसुरी प्रवृत्तियों का बोलबाला था।
    राम के राज्य की बात सुनते हीे अकसर मनमें विचार आते हैं। कि राम राज्य आज भी होना चाहिये। पर विचारणीय बाल है कि राम राज्य की स्थापना होगी कैसे? जिस राम के विषय में तुलसीदास जी ने रामचरित मानस में बड़े विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने अपने राज्य के माध्यम से बता दिया कि एक आदर्श राज्य कैसा होना चाहिये। यहां एक आदर्श राजा शासन कर रहा हो। साध्वी जी ने कहा कि राम राज्य के आधार- श्री राम थे जो ब्रह्यज्ञानी थे। यही कारण था कि वो अपनी प्रजा के हितों का ध्यान रखते थे । उन्होंने अपनी प्रजा के साधरण लोगों क ो भी कभी अनदेखा नहीं किया। उन्होंने बताया श्री राम हमारे हदय मे निवास करते है और उनका दर्शन केवल दिव्य नेत्र द्वारा होता है। जिसके बारे मे हमारे सभी धार्मिक शास्त्रों में बताया गया है। उन्होंने बताया जब हदय के भीतर सिंहासन पर राम विराजमान होते है, तब राम राज्य की स्थापना होती है।
    इस दौरान जिला प्रधान आशुतोष शर्मा की तरफ से कैबिनेट मंत्री सुंदर शाम अरोड़ा व अन्य गणमान्यों तथा संत समाज को सम्मान चिन्ह देकर सम्मानित किया। उन्होंने शक्ति मंदिर प्रबंधक कमेटी के सभी पदाधिकारियों का आभार व्यक्त किया जिन्होंने श्री राम कथा करवाने के लिए परशुराम सेना को पूरा सहयोग दिया। उन्होंने सभी सहयोगी सज्जनों व सेना के पदाधिकारियों का भी धन्यवाद किया जिनके सहयोग से श्री राम कथा करवाई जा सकी।
    अंतिम दिन श्री राम कथा भगवान राम जी की आरती के साथ विश्रामित हुई। अंतिम दिन की आरती में हरीश गुप्ता, प्रिंस शर्मा, राजवीर सूरी, पवन शर्मा, जगदीश मन्हास, ब्राह्मण सभा प्रगति के एडवोकेट सुनील पराशर, समाज सेवक विजय अरोड़ा, परशुराम सेना प्रधान गढ़शंकर कूलभुषण शोहरी, परमजीत सिंह, राजीव शर्मा शामिल हुए।

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