ब्रह्म ज्ञान को जीवन मे अपनाने से जीवन सरल व आनंददायक हो जाता है महात्मा अशोक

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    गढ़दीवाला (मनप्रीत मन्ना ) सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज की कृपा से संत निरंकारी सत्संग भवन गढ़दीवाला में ब्रांच के इंचार्ज महात्मा अवतार सिंह के नेतृत्व में संत समागम का आयोजन किया गया। इस मौके पर जोनल टूर के मुताबिक भंगाला ब्रांच के मुखी महात्मा अशोक कुमार विशेष तौर पर पहुंचे । उन्होंने प्रवचन करते हुए कहा कि प्रेम व भक्ति अगर इंसान की जिंदगी में आ जाए तो इंसान का जीवन रोशनमय हो जाता है। सतगुरु द्वारा दी गई ज्ञान की रोशनी से इंसान का जीवन रोशन हो जाता है। जब गुरसिख ज्ञान को अपने जीवन में धारण करता है तो प्यार, विनम्रता व सहनशीलता तथा अन्य दैवी गुण जीवन में आने शुरू हो जाते है। उन्होंने कहा कि संतो महापुरुषों के संदेश गुरसिख की भलाई के लिए होते है। उन्होंने गुरसिख के जीवन पर चर्चा करते हुए कहा कि गुरसिख का जीवन कहनी व करनी में एकसार होता है। सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के संदेशों का जिक्र करते हुए मुखी महात्मा अशोक कुमार जी ने कहा कि गुरसिख का जीवन ऐसा होना चाहिए कि वह मिशन की पहचान बने। सेवा,सिमरन व सत्संग को अपने जीवन का महत्वपूर्ण अंग मानते हुए इसको जीवन में अपनाना है। ब्रह्मज्ञान को जितना हम अपने जीवन में अपनाते है जीवन उतना ही सरल व आनंददायक होता चला जाता है। उन्होंने कहा कि संसार में अगर ठंडक आ सकती है तो केवल और केवल निरंकार प्रभु के नाम सिमरन से ही आ सकती है। माया से नाता तोडकऱ इस निरंकार प्रभु के साथ नाता जोडऩा है। इन्हीं संदेशों को लेकर सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज विभिन्न स्थानों पर जाकर संत समागम कर रहे है ताकि इंसान सुखी हो सके। उन्होंने कहा कि विनम्रता में रहना ही सभी गुणों का सार है। इस दौरान क्षमा याचना दिवस मनाया गया, इस दौरान संचालक सुरजीत सिंह, शिक्षक सुखबीर सिंह, डा. सुखदेव सिंह व अन्य पदाधिकारियों सहित सेवादल के सदस्यों ने संगत में क्षमा याचना शब्द गायन करके 71वें संत समागम के दौरान हुई भूलों की क्षमा मांगी। अंत में ब्रांच के इंचार्ज महात्मा अवतार सिंह के नेतृत्व सभी पदाधिकारियों ने भंगाला ब्रांच के मुखी अशोक कुमार का दुपट्टा पहना कर स्वागत व धन्यवाद किया। इस दौरान डा. सुखदेव कुमार ने मंच सचिव की भूमिका निभाई। इस अवसर पर कवि महात्मा विजय कुमार, जोगिंदर, विवेक कुमार, बहन कृष्मा जी, बहन प्रिया जी सहित भारी संख्या में संगत उपस्थित थी।

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