प्राचीन परंपराओं के चलते बचाया जा सकता है जल : तलवाड़

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    होशियारपुर (शाम शर्मा ) सदियों से भारत, विशेष तौर पर पंजाब में एक परंपरा रही है कि लोग जल को देवता की उपाधि देते हुए हर वर्ष एक दिन जल संसाधनों की विशेष पूजा करते थे, जिस से हमारी आने वाली पीढिय़ों को जल का महत्तव पता चलता था और लोग जल को दैवीय शक्ति मानते हुए उसे व्यर्थ नहीं गंवाते थे। उपरोक्त शब्द यूथ डिवेलपमेंट बोर्ड पंजाब के पूर्व चेयरमैन संजीव तलवाड़ ने आज वार्ड नंबर 4 में जल संसाधनों की विधिवत पूजा कर लोगों को जल बचाने का संदेश देते हुए कहे।
    तलवाड़ ने कहा कि आहिस्ता आहिस्ता आधुनिक परंपराओं ने हमारी प्राचीन परंपराओं को ओझल कर दिया है, जिस के चलते बहुत सी समस्याओं ने जन्म ले लिया है। उन्होने कहा कि विश्व भर को सौर ग्रहों की चाल बताने वाले विदवानों ने पीपल, तुलसी, जल, गाय पूजन आदि परंपराओं की शुरूआत की थी, पर जैसे जैसे लोग इन परंपराओं से दूर होते गए, तब तब पृथ्वी पर पर्यावरण असंतुलन बिगड़ा है।
    इस मौके पर भाजपा महिला मोर्चा, पंजाब की प्रदेश सचिव, पार्षद नीति तलवाड़ ने कहा कि वार्ड नंबर 4 में एक प्रयास किया गया है कि लोग दोबारा अपनी उन्ही परंपराओं का निर्वाह प्राचीन पध्दति से करें, जिस से पृथ्वी संकट मुक्त हो सके। उन्होने कहा कि वार्ड में तयौहारों को सामूहिक रूप से मनाने की परंपरा से बच्चों को इस की जानकारी मिलती है।
    इस मौके पर विधि पूर्वक जल संसाधनों की पूजा कर लोगों को जल बचाने के लिए प्रेरित किया गया। इस अवसर पर सरू बहल, दीपी सैनी, राम प्रकाश पाशा, गुरमीत सैनी, तिलक राज चौहान, बाणी, अदिति, रवि, शकुंतला देवी, दर्शना देवी व मोहल्ले के अन्य गणमान्य भी उपस्थित थे।

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