जिले को नशामुक्त बनाने में बेहतरीन भूमिका अदा कर रहे हैं ओ.ओ.ए.टी. क्लीनिक व नशामुक्ति  पुर्नवास केंद्र: डिप्टी कमिश्नर

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    होशियारपुर (रुपिंदर ) प्रशासन की ओर से आपसी तालमेल के साथ साथ जिले को नशा मुक्त करने का प्रयास किया जा रहा है और इसको लेकर किसी भी तरह की कमी नहीं छोड़ी जा रही है। नशे के दलदल में जकड़े  व्यक्तियों को इस दलदल से निकालने के लिए योग्य प्रयास किए जा रहे हैं, जिसमें ओ.ओ.ए.टी क्लीनिक, नशा छुड़ाओ केंद्र व पुर्नवास केंद्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। यह जानकारी देते हुए डिप्टी कमिश्नर श्रीमती ईशा कालिया ने कहा कि जिले में अलग-अलग स्थानों पर खुले ओ.ओ.ए.टी. क्लीनिक, नशा छुड़ाओ एवं पुर्नवास केंद्र में मरीजों को भेजा जा रहा है ताकि वे नशा छोड़ आम जिंदगी व्यतीत कर सकें।
    डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि जिले को नशामुक्त  करने के लिए सरकार की ओर दो नशा छुड़ाओ केंद्र सिविल अस्पताल होशियारपुर व सिविल अस्पताल दसूहा में चलाए जा रहे हैं, इसके अलावा 5 प्राईवेट नशा छुड़ाओ केंद्र है , वहीं एक नशामुक्ति  पुर्नवास केंद्र मोहल्ला फतेहगढ़ मेें भी चलाया जा रहा है। इन केंद्रों में हर तरह के नशे के मरीजों को 1-3 महीने तक दाखिल कर दवाईयां, काउंसलिंग व अन्य गतिविधियों से नि:शुल्क इलाज किया जा रहा है।
    डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि  मई 2018 से सरकार की ओर से जिले में ओ.ओ.ओ.ए.टी क्लीनिक ं शुरु  की गई है, जिसमें पोस्त से बनने वाले या उस जैसे असर वाले नशे जैसे कि हैरोइन(चिट्टा), अफीम, भुक्क ी, ट्रैमाडोल, प्रौकसी वन कैप्सूल, लोमोटिल गोलियां आदि से ग्रस्त मरीजों का इलाज किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जिले के 7 नशा छुड़ाओ केंद्रों में जनवरी 2019 तक 21,683 मरीजों की ओ.पी.डी. हो चुकी है यानि की इतने मरीज इलाज करवाने के लिए नशा छुड़ाओ केंद्रों पर आ रहे हैं। वहीं जिले के 9 ओ.ओ.ए.टी. क्लीनिकों में अभी तक 1024 मरीजों की रजिस्ट्रेशन की गई है। इसके अलावा नशामुक्ति  व पुर्नवास केंद्र में अब तक 568 मरीज इलाज करवा चुके हैं। उन्होंने बताया कि अब तक होशियारपुर जिले में 9 ओ.ओ.ए.टी. क्लीनिक, नशामुक्ति  पुर्नवास केंद्र मोहल्ला फतेहगढ़, सिविल अस्पताल दसूहा, सिविल अस्पताल मुकेरियां, सिविल अस्पताल गढ़शंकर, सी.एच.सी. बुड्डाबढ़, हाजीपुर, टांडा, भूंगा, हारटा बडला में चल रहे हैं, और भविष्य में जिले के सभी सी.एच.सी. में शुरु  किए जा रहे हैं।
    डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि मरीजों के इलाज के लिए जीभ के नीचे रखने वाली गोली बुप्रीनौरफिन, पल्स नलौक्सन से डाक्टर व काउंसलर की सीधी देखरेख में किया जा रहा है। यह गोली कानूनी तौर पर मान्यता प्राप्त है और सीधी देखरेख में ही दी जाती है। इसके ओवरडोज से मौत नहीं होती और मरीज नशे के पीछे भागता भी नहीं है। जिससे पैसे की बर्बादी तो रु कती ही है साथ ही मरीज दवाई खाने के बाद पूरा दिन बिना किसी रु कावट के अपना काम कर सकता है। उन्होंने बताया कि मरीज को डाक्टर व काउंसलर की मदद व उसके वारिसों के सहयोग से एक साल के भीतर नशा मुक्त  करने का प्रयास किया जा रहा है।
    डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि पंजाब सरकार की तरफ से शुरू की बेहतरीन अभियान मिशन तंदुरु स्त पंजाब के अंतर्गत डैपो व बडी प्रोग्राम के अंतर्गत नशे पर काफी हद तक नकेल लगाई जा चुकी है। उन्होंने बताया कि जिले में एस.डी.एम्ज सब डिविजन स्तर पर निगरानी रखे हुए हैं, जिससे अधिक से अधिक नशे में फंसी जिंदगियों को बचाया जा सके और नशा बेचने वालों पर शिकंजा कसा जा सके। श्रीमती ईशा कालिया ने बतााया कि गांवों में नशा करने वाले व्यक्तियों की पहचान करने उन्हें नशा छुड़ाओ केंद्रों के बारे में जागरूक किया जा रहा है, जिससे वह अपना इलाज करवा  सकें।

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