अंतरराष्ट्रीय कोर्ट से चीन को झटका, दक्षिण चीन सागर पर दावा खारिज

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    080629-G-9409H-602 SOUTH CHINA SEA (June 29, 2008) U.S. Navy and Republic of Singapore ships steam through the South China Sea for the second of two combined Republic of Singapore and United States naval formations during a division tactics exercise during Cooperation Afloat Readiness and Training (CARAT) 2008. CARAT is an annual series of bilateral military training exercises between the United States and several Southeast Asian nations. U.S. Coast Guard photo by Public Affairs Specialist 3rd Class Angela Henderson (Released)

    दक्षिण चीन सागर पर चीन को तगड़ा झटका लगा है। संयुक्त राष्ट्र समर्थित हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट कहा है कि दक्षिण चीन सागर पर चीन का कोई ऐतिहासिक अधिकार नहीं है। फिलीपींस ने ‘9 डैश लाइन’ समेत 15 बिंदुओं पर अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल में शिकायत की थी। 1947 में चीन ने दक्षिण चीन सागर का नक्शा जारी करते हुए ‘यू’ के आकार की ‘9 डैश लाइन’ के भीतर आने वाले क्षेत्र पर अपना दावा किया था। चीन ने फैसले को मानने से इनकार कर दिया है जबकि फिलीपींस ने फैसले का स्वागत किया है।

    उधर, भारत भी संयुक्त राष्ट्र समर्थित ट्रिब्यूनल के फैसले का अध्ययन कर रहा है। सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। ट्रिब्यूनल ने सोमवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा कि चीन ने समुद्र के जिन संसाधनों पर एकाधिकार जताया है, उनमें से किसी में भी विशेष आर्थिक जोन (ईईजेड) के अंतर्गत आने की क्षमता नहीं है। मछली और तेल-गैस जैसे प्राकृतिक संसाधनों की मौजूदगी से ही कोई देश को उस स्थान के 200 नाॠटिकल मील के भीतर अपना अधिकार जता सकता है। फिलीपींस और चीन के बीच लंबे समय से इस क्षेत्र के अधिकार को लेकर खींचतान चल रही थी।

    फैसले के अहम बिंदु
    –फिलीपींस के विशेष आर्थिक जोन में घुसकर कृत्रिम द्वीप बनाकर चीन ने उसके संप्रभुता के अधिकार का हनन किया
    –कृत्रिम द्वीप बनाकर ‘कोरल रीफ’ (मूंगे की चट्टान) को नुकसान पहुंचाया
    –बड़े पैमाने पर चीनी मछुआरों ने दुर्लभ कछुओं को मारा
    –स्कैरबोरोग शाल एरिया में दोनों देशों को मछली पकड़ने का अधिकार। चीन ने रास्ता रोककर गलत किया।

    दक्षिण चीन सागर पर तनाव बढ़ने के आसार
    फिलीपींस भले ही अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल के फैसले को ऐतिहासिक बता रहा है, लेकिन चीन ने फैसले को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। चीन के मौजूदा कदम से इस क्षेत्र में लंबे समय से चले आ रहे तनाव के बढ़ने के आसार पैदा हो गए हैं। चीन ने साफ कह दिया कि अंतरराष्ट्रीय अदालत कोई भी फैसला सुनाए, वो दक्षिण चीन सागर में अपने समुद्री हितों की रक्षा करेगा। उसने एक बार फिर कहा है कि चीनी सेनाएं धमकियों और खतरों से निपटने के लिए तैयार हैं।

    चीन पर बढ़ सकता दबाव
    दक्षिण चीन सागर के विवाद में पहली बार अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल ने कोई फैसला सुनाया है। हालांकि इसे लागू करवाना अंतरराष्ट्रीय अदालत के अधिकार क्षेत्र में नहीं है। इससे चीन पर दबाव बढ़ सकता है क्योंकि इस क्षेत्र में अपने अधिकार को लेकर चीन का विवाद कई देशों से चल रहा है। फिलीपींस की सफलता के बाद वियतनाम, मलेशिया, ब्रुनेई जैसे देश भी यही रास्ता अपना सकते हैं। हालांकि इस फैसले के बाद आपसी विवाद का खतरा भी बढ़ गया है।

    फैसला भारत के लिए अहम
    –आर्थिक और सुरक्षा की दृष्टि से भारत के लिए फायदेमंद
    –अन्य देशों के साथ मिलकर दक्षिण चीन सागर में प्राकृतिक संसाधनों के खनन और इन्फ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने में आसानी
    –व्यापार के लिए समुद्री आवागमन सुगम होगा
    –सुरक्षा की दृष्टि से भी भारत की चिंताएं कम होने की संभावना

    इन देशों का दावा
    चीन, ब्रुनेई, मलेशिया, फिलीपींस, वियतनाम, ताइवान

    कहां-कहां विवाद
    चीन की ‘नाइन डैश लाइन’, स्प्राट्लिस द्वीप और पैरासेल्स द्वीप के हिस्से

    कब शुरू हुआ विवाद
    –1947 में चीन ने अपने नक्शे में स्प्राट्लिस द्वीप और पैरासेल्स द्वीप को दिखाया
    –ताइवान ने विरोध करते हुए दावा किया इन दोनों द्वीपों पर उसका 17वीं शताब्दी से राज है
    ‘9 डैश लाइन’ के दावे के खिलाफ 2013 में फिलिपींस ने अंतरराष्ट्रीय अदालत का दरवाजा खटखटाया

    आखिर क्यों अहम
    –खनिज, तेल और गैस समेत बहुत से प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर
    –समुद्री व्यापार के आवागमन के साथ-साथ सुरक्षा और सामरिक दृष्टि से भी बेहद अहम

    अमेरिका की चिंता
    –आवागमन की स्वतंत्रता बाधित होना। व्यापारिक आवागमन के लिहाज से अमेरिका के लिए अहम।
    –दक्षिण चीन सागर में चीनी सेना की तैनाती और युद्धाभ्यास करना

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