PAK: पनामा लीक केस की जांच करेगी JIT, नवाज को होना होगा पेश, कतर पैसा भेजने की भी होगी जांच

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    JANGATHA TIMES : आज का दिन पाकिस्तान के लिए बहुत ही अहम रहा. पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने बहुचर्चित और बहुप्रतीक्षित पनामा पेपर्स मामले पर अपना फैसला सुनाया. पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय बेंच ने 3-2 से फैसला सुनाया है. अपने फैसले में पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने सुंयुक्त जांच टीम बनाने को कहा है. गौर करने वाली बात है कि 2 जज नवाज को अयोग्य ठहराने के पक्ष में थे.

    संयुक्त जांच टीम पैसा कतर भेजे जाने की जांच करेगी. कोर्ट ने कहा कि नवाज और उनके दोनों बेटों को जांच टीम के सामने पेश होना होगा.

    आपको बता दें कि यह फैसला कहीं न कहीं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के भविष्य पर भी असर डालेगा. क्योंकि पाकिस्तान के कई राजनैतिक दलों (तहरीक-ए-इंसाफ, जमात-ए-इस्लामी, आवामी मुस्लिम लीग व अन्य दलों) ने नवाज शरीफ के खिलाफ याचिका दायर की थी. आपको याद दिला दें कि पिछले साल अप्रैल में पनामा पेपर्स ने पाकिस्तान की राजनीति में भूचाल ला दिया था.

    पहले से ही उम्मीद की जा रही है थी कि कोर्ट इस मामले में काफी विस्तृत फैसला जारी करेगा. बता दें कि पनामा पेपर्स से जानकारी मिली थी कि पाक प्रधानमंत्री के बच्चों के स्वामित्व वाली कुछ कंपनियां हैं जो बाहरी मुल्कों में कारोबार कर रही हैं, जिनका लेनदेन लाखों डॉलर में है.

    इससे पहले बचाव पक्ष और अभियोजन पक्ष की दलीलें समाप्त होने के बाद पाकिस्तान की सर्वोच्च अदालत ने 23 फरवरी को कहा था कि वह पनामागेट मामले में अपना फैसला सुरक्षित रखती है और विस्तृत फैसला सुनाएगी.

    नवाज का क्या होगा?
    जानकारों के अंदाजा था कि कोर्ट नवाज शरीफ को बरी कर सकती है क्योंकि पनामा पेपर में उनके नाम का जिक्र नहीं है. इसके अलावा, इस्लामाबाद में इस बात की भी चर्चा थी कि पाकिस्तान का सुप्रीम कोर्ट मामले की जांच के लिए एक न्यायिक कमीशन गठित कर सकता है या फिर उन्हें पद के लिए अयोग्य भी घोषित कर सकता है, जैसा कि 2012 में तत्कालीन प्रधान मंत्री यूसुफ रजा गिलानी के साथ अदालत की अवमानना के एक मामले में किया था. फैसले से पहले ही सभी राजनीतिज्ञों और कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि कोर्ट का फैसला ‘ऐतिहासिक’ हो सकता है.

    पुराना है मामला
    यह मुकदमा 1990 के दशक में शरीफ द्वारा धन शोधन कर लंदन में संपत्ति खरीदने का है. शरीफ उस दौरान दो बार प्रधानमंत्री रहे थे. सुप्रीम कोर्ट में पांच जजों की बेंच के मुखिया जस्टिस आसिफ सईद खोसा ने इस केस की सुनवाई की थी. इस बेंच के अन्य सदस्य जस्टिस एजाज अफजल, जस्चटस गुलजार अहमद, जस्टिस शेख अजमत और जस्टिस एजाज उल हसन हैं.

    समयपूर्व चुनाव करा सकती है शरीफ की पार्टी

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