रयात बाहरा की स्टूडेंट माधवी ने हासिल किया PCS में 25 वां स्थान

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    होशियारपुर
    पंजाब सिविल सर्विस एग्जाम में होशियारपुर की माधवी ने प्रदेश में 25 वां स्थान हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है। 24 वर्षीय माधवी का पीसीएस एग्जाम का यह पहला अटेंप्ट था और पहले ही एटेंप्ट में उसने शानदार प्रदर्शन करते हुए पंजाब की सबसे बड़ी सरकारी अधिकारी बनने की परीक्षा पास कर ली।
    माधवी के पिता अशोक कुमार रिटायर्ड अध्यापक व उनकी मां संतोष कुमारी महिला व बाल विकास विभाग होशियारपुर में सुपरवाइजर तैनात है। माधवी का बड़ा भाई पारस शर्मा इस समय कुवैत में है।
    माधवी ने रयात-बाहरा एजुकेशन सिटी होशियारपुर से बीटैक इलेक्ट्रानिक एंड कम्यूनिकेशन में की है। वर्ष 2015 में उसने पीसीएस प्रारंभिक की परीक्षा पास की और मार्च 2016 में उसने मेन्स क्लीयर किया जिसमें उसके एक हजार में से 712 अंक आए। इसी तरह एक अगस्त 2016 को उसकी पंजाब सिविल सर्विसेज कमिशन पटियाला में इंटरव्यू हुआ और इंटरव्यू में उसके 150 में से 114.8 नंबर आए। माधवी बचपन से ही पढ़ाई में होशियार है। पांचवी में वह जिला टापर रही है। इसके अलावा आठवीं में वह मेरिट लिस्ट में थी। दसवीं में माधवी के 88 प्रतिशत, बारहवीं नान मेडिकल में 85 प्रतिशत व बीटैक में उसके 89 प्रतिशत अंक हासिल किए थे

    पीसीएस की नहीं आईएएस की तैयारी की थी
    माधवी शर्मा ने बताया कि वह 2014 से आईएएस की तैयारी कर रही है और वह आईएएस का एग्जाम दे भी चुकी है। प्रारंभिक परीक्षा पास कर ली थी लेकिन मेन्स में वह दो तीन अंको से रह गई है। उसने दोबारा फिर आईएएस के लिए प्रारंभिक परीक्षा दी है। पीसीएस के लिए उसने अलग से तैयारी नहीं की बल्कि आईएएस की तैयारी ही उसके लिए पीसीएस में काम आ गई। होशियारपुर के आईएएस व पीसीएस ट्रेनर कैप्टन मुनीश ने उन्हें गाईड किया और उनकी मदद से कुछ वीडियो क्लासिज से काफी मदद मिली।

    इंटरव्यू में पूछा खोते और गधे में क्या होता है फर्क
    माधवी ने कहा कि इंटरव्यू में मुझसे काफी सवाल पूछे गए। इंटरव्यू बोर्ड ने ज्यूडिशयरी व प्रशासन के संबंध में कुछ सवाल पूछे। बाद में उन्होंने कहा कि पूछा की तुमने फस्र्ट प्रेफरेंस डीएसपी भरी है, तुम्हारी तो आवाज बहुत साफ्ट है डीएसपी बन गई तो डंडे कैसे मारोगी। मैंने कहा सर पुलिस अफसर बन कर सिर्फ डंडे नहीं मारने लोगों को न्याय भी दिलाना है तो पब्लिक डिलिंग साफ्ट होनी ही चाहिए। फिर उन्होंने मुझसे पूछा कि खोते और गधे में क्या फर्क है। मैंने कहा दोनों एक ही जानवर का नाम है उन्होंने फिर इसी से जुड़ा एक और सवाल पूछा और मैंने जो जवाब दिया इंटरव्यू में उन्होंने संतोष प्रकट किया। माधवी ने कहा कि इंटरव्यू बोर्ड तरह-तरह के सवाल पूछ कर कैडीडेट का मेंटल लेवल चैक करते है। वे बड़ी खूबसूरती से पता कर लेते है कि कैंडीडेट सच बोल रहा है या झूठ।

    थाने गई थी एफआईआर दर्ज करवाने, वहां सोचा अफसर बनूंगी
    माधवी ने कहा कि जब छोटे थे तो यही पता होता था कि डीसी बड़ा अफसर है। बाद में पता चला कि अफसर कैसे बनते थे। पढ़ाई के दौरान डीएमसी गुम हो गई तो मैं होशियारपुर थाने में एफआईआर दर्ज करवाने अकेले चली गई। वहां मैंने किसी भी महिला पुलिस कर्मी को नहीं देखा तो लगा कि मैंने तो अपनी बात बेहिचक पुलिस को बता दी लेकिन कई महिलाएं नहीं बता पाती होंगी। फिर मैंने निश्चिय किया कि महिलाओं का हर क्षेत्र में आगे आना जरुरी है। माधवी ने कहा कि पीसीएस मेरा पहला माइल स्टोन है मेरा लक्ष्य आईएएस है और मुझे पूरी उम्मीद है कि मैं अपने लक्ष्य को जरुर पाऊंगी।

    सपनों का पीछा जरुर करो सफलता मिलती है
    माधवी ने कहा कि उसका कोई प्रेरणा स्त्रोत नहीं है। उसे जहां से सकारात्मक बात सीखने को मिलती है वह सीख लेती है। माधवी ने कहा कि उसके परिजनों ने उसे हमेशा स्पोर्ट किया है जिसके कारण ही वह आज पीसीएस क्लीयर कर पाई है। उसने कहा कि मुझे तो बस इतना पता है सपनों का जरुर पीछा करो, मेहनत करों, सफलता जरुर मिलती है।

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