स्वदेशी तेजस विमान का पहला स्क्वाड्रन वायुसेना में शामिल

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    बेंगलुरू। देश के सैन्य विमानन क्षेत्र में बड़ा मुकाम तय करते हुए देश में ही बने हल्के लड़ाकू विमान तेजस की पहली स्क्वाड्रन को वायुसेना में शामिल किया गया है। पहली खेप में दो विमान वायुसेना में शामिल किए गए हैं। सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने यहां ‘एयरक्राफ्ट सिस्टम टेस्टिंग इस्टैबलिशमेंट’ में एक कार्यक्रम के दौरान वायुसेना के दो तेजस विमान सौंपे। पहली स्क्वाड्रन को ‘फ्लाइंग डैगर्स’ नाम दिया गया है।
    विमानों को वायुसेना में शामिल किए जाने के समारोह के दौरान कमांडिंग ऑफिसर ग्रुप कैप्टन माधव रंगचारी ने एक तेजस विमान को उड़ाया। इस समारोह में दक्षिणी वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ एयर मार्शल जसबीर वालिया तथा एचएएल के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। इस हल्के लड़ाकू विमान का विकास तीन दशक से अधिक समय पहले शुरू हुआ था। अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री रहते इस विमान का नाम ‘तेजस’ रखा गया था। यह स्क्वाड्रन पहले दो वर्ष बेंगलुरू आधारित होगा। इसके बाद इसे तमिलनाडु के सुलूर स्थानांतरित किया जाएगा। वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अरूप राहा ने इस ‘देसी’ विमान की तारीफ करते हुए इसे वायुसेना में शामिल करने के लिए अच्छा बताया। उन्होंने बीते 17 मई को तेजस से पहली उड़ान भरी थी।
    वायुसेना ने इस वित्तीय वर्ष में 6 और अगले वित्त वर्ष में करीब आठ तेजस विमानों को शामिल करने की योजना बनाई है। उसका कहना है कि तेजस अगले साल की योजना में तेजस मुख्य रूप से शामिल होगा और इसे अग्रिम ठिकानों पर भी तैनात किया जाएगा। तेजस विमान धीरे धीरे वायुसेना में मिग-21 विमानों की जगह ले लेंगे। रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने इस महीने की शुरूआत में कहा था, ‘मुझे लगता कि अगले साल दो साल में मिग-21 स्क्वाड्रन को हटाया जाएगा। शुरूआत में इनके स्थान पर यह विमान शामिल होगा।’’ उन्होंने कहा था, ‘‘हल्के लड़ाकू विमान उन मिग विमानों से बेहतर हैं जो पुराने हो चुके हैं तथा उनके कल-पुर्जें मिलने में भी दिक्कत होती है।’’
    तेजस के सभी स्क्वाड्रन में 20 विमान होंगे। योजना के अनुसार ‘इनीशियल ऑपरेशन क्लियरेंस’ के तहत 20 विमानों को शामिल किया जाएगा और बाद में ‘बियांड विजुअल रेंज मिसाइल’ की क्षमता से लैस 20 विमानों को शामिल किया जाएगा। वायुसेना की योजना बेहतर खूबियों वाले 80 से अधिक विमानों को शामिल करने की है। इन विमानों को तेजस 1ए के तौर पर जाना जाएगा। तेजस को ‘एक्टिव इलेक्ट्रानिक स्कैंड आरे रडार’ तथा दूसरी खूबियों के साथ उन्नत बनाने में 275 से 300 करोड़ रूपये के बीच खर्च आएगा। स्वदेशी लड़ाकू विमान का विचार 1970 के दशक में आया था, लेकिन इस पर काम 1980 के दशक में आरंभ हुआ। तेजस विमान ने पहली बार जनवरी, 2001 में उड़ान भरी थी।

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