1000 करोड़ का सिंचाई घोटाला: विजिलेंस को हाईकोर्ट ने जारी किए आदेश

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चंडीगढ़: पंजाब में वर्ष 2017 में सामने आए 1000 करोड़ से भी अधिक राशि के सिंचाई घोटाले में पंजाब के 2 पूर्व मंत्रियों और रिटायर हो चुके 3 आई.ए.एस. अधिकारियों को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए विजिलेंस को आदेश दिए हैं कि मामले की अगले सुनवाई तक न तो किसी को गिरफ्तार किया जाए और न ही सम्मन या नोटिस जारी किए जाएं। पंजाब सरकार व विजिलेंस से स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया है कि वह उक्त 2 मंत्रियों व आई.ए.एस. अधिकारियों को इन्वेस्टिगेशन के लिए बुलाना चाहती है या इनक्वायरी करना चाहती है। मामले में अब सुनवाई 8 फरवरी-2023 को होगी।

17 अगस्त-2017 को विजिलेंस ने सिंचाई विभाग के एक बड़े ठेकेदार गुरिंद्र सिंह के खिलाफ मोहाली थाने में विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज करते हुए उसे गिरफ्तार किया था। गुरिंद्र सिंह ने इन्वेस्टिगेशन के दौरान बताया था कि उसने याची करणबीर सिंह सिद्धू को साढ़े 5 करोड़ व 2 अन्य आई.ए.एस. अधिकारियों सर्वेश कौशल व काहन सिंह पन्नू को साढ़े 8 व 7 करोड़ रुपए रिश्वत के रूप में दिए थे जबकि उस वक्त राज्य में मंत्री रहे जनमेजा सिंह सेखों को साढ़े 7 करोड़ व शरणजीत सिंह ढिल्लों को अढ़ाई करोड़ रुपए दिए थे।

विजिलेंस के सूत्रों के अनुसार ठेकेदार गुरिंद्र सिंह को 2007 से लेकर 2016 तक 1000 करोड़ रुपए से ज्यादा के काम अलॉट हुए थे। इसे लेकर उसने इन अफसरों, पूर्व मंत्रियों व अन्य 20-22 लोगों को पैसा दिया। गुरिंद्र सिंह के बारे में कहा जाता है कि सिंचाई विभाग में नीचे से लेकर ऊपर तक अफसर भी उसकी पसंद के ही लगते थे। 2006 में 4.75 करोड़ रुपए की उसकी कंपनी मात्र 10 वर्ष में 300 करोड़ रुपए की हो गई। इस मामले में विजिलेंस विभाग ने अब तक गुरिंद्र सिंह और विभाग के रिटायर इंजीनियरों को गिरफ्तार किया था।

तत्कालीन कांग्रेस सरकार से विजिलेंस ने उक्त मंत्रियों व आई.ए.एस. अधिकारियों से पूछताछ करने की अनुमति मांगी थी लेकिन सरकार ने इंकार कर दिया था। सरकार बदलते ही विजिलेंस ने एक बार फिर सरकार को पत्र लिखकर उक्त आई.ए.एस. अधिकारियों व 2 मंत्रियों से पूछताछ करने की अनुमति मांगी थी, जोकि सरकार ने दे दी थी।

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