यूं लगाते हैं हमारे बुजुर्ग वर्षा संबंधी पूर्वानुमान

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    आजकल तो विज्ञान के बलबूते मौसम का पूर्वानुमान बड़ी आसानी से लगाया जा रहा है। लेकिन, प्राचीनकाल में जब वैज्ञानिक तकनीकों का नितांत अभाव था, तब हमारे पूर्वज मौसम का बेहद सटीक पूर्वानुमान लगा लिया करते थे। यह तथ्य चौंकाने वाला बेशक हो, लेकिन हकीकत है। खास बात यह है कि मौसम को पूर्वानुमान लगाने में कई बार विज्ञान चूक जाता है, लेकिन, हमारे बुजुर्गों के मौसम सम्बंधी अनुमान बेहद अचूक रहे। इस वर्ष वैज्ञानिकों ने मानसून सम्बंधी पूर्वानुमान लगाया था कि इस बार मानसून 106 फीसदी रहेगा और छह दिन देर से आयेगा। शुरूआती दौर में यह अनुमान शतप्रतिशत सही साबित होता दिखाई नहीं दे रहा है। कई जगह पर मानसून उम्मीद से कहीं ज्यादा देर से आया है। अब कितने प्रतिशत वर्षा होगी, यह तो मानसून जाने के बाद ही पता चल सकेगा। लेकिन, वर्षा सम्बंधी अनुभवों के बाद बुजुर्गों ने कई ऐसे लक्षण चिन्हित किए थे, जो हमेशा सच साबित हुए।

    बड़े बुजुर्ग वर्षा का पूर्वानुमान प्राकृतिक लक्षणों के आधार पर भलीभांति लगाते रहे हैं। उनके अनुभवों के अनुसार यदि सूर्योदय के समय सूर्य की तेज धारीदार कांति हो तो 48 घण्टे के अंदर निश्चित तौरपर वर्षा होगी। बुजुर्ग बिल्कुल साफ आकाश में तेज चमकते व झिलमिलाते तारों को भी वर्षा आने का सूचक मानते आए हैं। बुर्जुग लोग तो आक के पौधों पर लगी डोडियों से भी वर्षा का सटीक अनुमान लगा लेते हैं। उनका आज भी मानना है कि यदि गाय रूंग (रोएं) पाड़ जाएं, चींटियां अपने अंडों को लेकर ऊपर की तरफ प्रस्थान करने लग जाएं, मेंढकी टर्राएं, पपीहा पक्षी शोर मचाये, चिड़िया बालू रेत में नहाने लगें, घर में रखा नमक, गुड़ आदि चीजें पसीजने लग जायें, सण (रेशा) की खाट स्वतः अकड़ जाये, गोह (एक वन्य प्राणी) बोलने लगे, सूरज पर कुंडल छा जाये और चन्द्रमा पर जुलहरी बन जाए तो वर्षा निश्चित तौर पर चैबीस से अड़तालीस घण्टे में होगी।

    बुजुर्ग लोगों का अनुभव कहता है कि बैया पक्षी वृक्ष के जिस तरफ घोंसला बनाता है, उसकी विपरित दिशा की तरफ से ज्यादा वर्षा होगी। जब मछलियां जल की सतह पर छलांग मारें, बिल्ली भूमि खोदे, सांपों का जोड़ा व पशु आकाश की ओर देखे, पालतू पशु बाहर जाने से घबराएं तो तुरंत ही वर्षा होती है। ये वर्षा के लिए शुभ शकुन माने जाते हैं। बुजुर्ग लोग ऐसा विश्वास करते हैं कि यदि रात्रि में दीपकीट दिखाई दे, कीड़े या सरीसृप घास के ऊपर बैठें तो भी तत्काल वर्षा होती है। यदि वर्षा ऋतु के दौरान सायंकाल में गीदड़ों की चिल्लाहट सुनाई दे तो बिल्कुल वर्षा नहीं होती है। यदि आसमान बादलों से घिरा हो व पालतू कुत्ता घर से बाहर न जाए, तो वर्षा जरूर होगी। यदि आसमान में चील काफी ऊंचाई पर उड़ रही हो, तो भी वर्षा होने वाली होती है। यदि मकड़ी घर के बाहर जाला बनाए तो यह वर्षा ऋतु जाने का संकेत है। मेढकों की टर्रराहट वर्षा का संकेत है। मोर का नृत्य तथा शोर भी वर्षा का सूचक है।

    इसी तरह, बुजुर्गों द्वारा वर्षा सम्बंधी अनुमान लगाने वाले अनेक मुहावरे एवं लोकोक्तियां भी बेहद प्रचलित हैं। गाँव-देहात के लोग वर्षा के सन्दर्भ में आज भी अपने अनुभवों, लोकोक्तियों एवं मुहावरों के रूप में प्रचलित अचूक अनुमानों, एवं सामान्य प्राकृतिक लक्षणों को अधिक अहमियत देते हैं। लोक संस्कृति में वर्षा/मानसून के मौसम को ‘सामण’ या ‘सावन’ या फिर ‘श्रावण’ माह के नाम से जाना जाता है। सुखद आश्चर्य की बात है कि पुराने लोगों व ऋषि-मुनियों, तपस्वियों, योगियों द्वारा अनुभव के बाद तय किए गए निष्कर्ष व अनुमान आज तक अचूक बने हुए हैं। वर्षा होने या न होने संबंधी लाक्षणिक कहावतें व लोकोक्तियां आज भी अक्षरशः खरी उतरती हैं। उन कहावतों व लोकोक्तियों की एक बानगी यहां प्रस्तुत है-
    तपे जेठ।
    वर्षा हो भरपेट।।

    (अर्थात, ज्येष्ठ मास में जितनी ज्यादा गर्मी व लू पड़ेगी, उतनी ही ज्यादा वर्षा होगी। ज्येष्ठ मास तपने पर वर्षा भरपूर होती है।)
    उतरे जेठ जो बोले दादर।
    बिन बरसे ना जाए बादर।।

    (अर्थात, यदि उतरते ज्येष्ठ मास मेंढक टर्राएं तो समझना चाहिए कि बादल बिना बरसे नहीं जाएंगे। इसका मतलब खूब वर्षा होगी।)
    सावन पहली दशवीं जै रोशनी होए।
    बड़ा सम्मत निपजे चिंता करने ना कोए।।

    (अर्थात, यदि सावन लगते ही दसवीं तिथि को रोशनी नक्षत्र हो तो अच्छी वर्षा होगी और अकाल संबंधी कोई आपदा नहीं आएगी।)
    पच्छम चमकै बिजली अर उद्गम चालै बाल।
    कह जाट सुण जाटणी बिस्तर खटिया घाल।।

    (अर्थात, पश्चिम दिशा में बिजली चमकने व पूर्व
    दिशा से हवा चलने पर जाट किसानी अपनी पत्नी से बिस्तर घर के अंदर लगाने के लिए कहता है, क्योंकि ये दोनों लक्षण वर्षा होने के हैं।)
    पहली पवन पूर्व से आवे।
    बरसे मेघ अन्न भर लावै।।

    (अर्थात, यदि मानसून की पहली हवा पूर्व दिशा से आए तो समझना चाहिए कि खूब वर्षा होगी और खूब अन्न उत्पादित होगा।)
     
    शनिचर की झड़ी।
    कोठा ना कड़ी।

    (अर्थात, यदि शनिवार के दिन वर्षा शुरू हो जाये तो समझिए कि लगातार कई दिन तक वर्षा होगी, जिससे मकान की छत को भी खतरा हो सकता है।)

     

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