कश्मीर में चार आतंकियों को ढेर करने वाले हवलदार को मरणोपरांत अशोक चक्र

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    उत्तरी कश्मीर में चार आतंकियों को ढेर कर शहादत देने वाले हवलदार हंगपन दादा को मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया जाएगा। रविवार को स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर केंद्र सरकार ने 14 शौर्य चक्र, 63 सेना मेडल, दो नौसेना मेडल और दो वायु सेना मेडल का भी ऐलान किया।

    अशोक चक्र शांतिकाल में दिया जाने वाला दूसरे सबसे बड़ा वीरता पदक है। हंगपन दादा कश्मीर की बर्फीली हिमालयी पहाड़ियों पर 13 हजार फुट की ऊंचाई पर तैनात थे। अरुणाचल प्रदेश के बोदुरिया गांव के रहने वाले हवलदार हंगपन अपनी टीम में दादा के नाम से लोकप्रिय थे। वह 2015 से उच्च पर्वतीय रेंज में तैनात थे। उन्हें 1997 में सेना की असम रेजीमेंट में शामिल किया गया था। आतंकवाद रोधी अभियानों के तहत उन्हें 35 राष्ट्रीय राइफल्स में तैनात किया गया था। दादा के परिवार में उनकी पत्नी चासेन लोवांग, दस साल की बेटी रोउखिन और छह साल का बेटा सेनवांग है।

    ऊंची पहाड़ियों पर मौजूद आतंकियों को ललकारा
    इस साल 27 मई को शमसाबरी रेंज में दादा और उनकी टीम ने आतंकियों की हलचल देखी। आतंकियों के ऊंचाई पर होने के बावजूद दादा ने बिना वक्त गंवाएं उन्हें ललकारा। दोनों ओर से करीब 24 घंटे तक गोलियां चलीं। जान की परवाह किए बिना दादा ने दो आतंकियों को मौके पर ही ढेर कर दिया, जबकि तीसरे से उनकी हाथापाई भी हुई लेकिन उसे भी उन्होंने मौत की नींद सुला दी। चौथे आतंकियों को उनकी टीम ने ढेर कर दिया। हालांकि ऊंची पहाड़ियों पर छिपे आतंकियों से सीधे मोर्चा लेने वाले दादा मुठभेड़ में बुरी तरह घायल हुए। लेकिन गोलीबारी की सीधी जद में आए अपने साथियों की जान बचाते हुए उन्होंने अपनी शहादत दे दी।

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