कैसे टिकट कलेक्टर से क्रिकेटर बने धोनी!

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    कैप्टन कूल कहे जाने वाले महेंद्र सिंह धोनी टीम इंडिया के सबसे सफलतम कप्तान माने जाते हैं। आज धोनी जिस मुकाम पर हैं, वहां तक पहुंचना आसान नहीं था। कुछ सालों पहले महज 300 रुपये के लिए काम करने वाले धोनी पर आज करोड़ों की बरसात होती है। हर बड़ा ब्रांड उनके लिए लाइन लगाए खड़ा रहता है, लेकिन आसमान की इस ऊंचाई पर पहुंचने के लिए धोनी को काफी मशक्कत करनी पड़ी। एक छोटे शहर की गलियों में क्रिकेट खेलने वाले धोनी कैसे आज इस मुकाम पर पहुंचे इसकी कहानी बेहद दिलचस्प है। पढ़ें: धोनी के जीवन का सफर-

    स्कूल में ही थामा बल्ला

    महेंद्र सिंह धोनी का जन्म झारखंड के रांची में हुआ था, उनके पिता का नाम पान सिंह और मां का नाम देवकी देवी है, धोनी की एक बहन जयंती और एक भाई नरेंद्र भी है। धोनी के परिजनों ने कभी सोचा भी नहीं था, कि उनका बेटा एक दिन पूरी दुनिया में उनका और अपने देश का नाम रौशन करेगा। धोनी की पढ़ाई रांची के जवाहर विद्यालय में हुई, इसी स्कूल में सबसे पहले धोनी ने क्रिकेट का बल्ला भी थामा था। 1992 में जब धोनी छठी क्लास में पढ़ रहे थे, तभी उनके स्कूल को एक विकेट कीपर की जरूरत थी, लिहाजा उन्हें विकेट के पीछे खड़े होने का मौका मिला। जब स्कूल के दोस्त पढ़ाई से समय बचने पर खेलते थे तब महेंद्र सिंह धोनी क्रिकेट से समय मिलने पर पढ़ाई किया करते थे। स्कूल के बाद धोनी जिलास्तरीय कमांडो क्रिकेट क्लब से खेलने लगे थे। इसके बाद उन्होंने सेंट्रल कोल फील्ड लिमिटेड की टीम से भी क्रिकेट खेला और हर जगह अपने खेल से लोगों का दिल जीतते चले गए।

     

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    टिकट कलेक्टर बने धोनी

    धोनी ने पहली बार 18 साल की उम्र में रणजी मैच खेला था, धोनी बिहार रणजी टीम की तरफ से खेलते थे, इसी दौरान रेलवे में बतौर टिकट कलेक्टर धोनी की नौकरी भी लग गई और उनकी पहली पोस्टिंग पश्चिम बंगाल के खड़गपुर में हुई थी। 2001 से 2003 तक धोनी खड़गपुर के स्टेडियम में क्रिकेट खेला करते थे, 22 साल की उम्र में धोनी रेलवे की नौकरी करने खड़गपुर पहुंचे, लेकिन धोनी को ये नौकरी रास नहीं आई। धोनी को तो कुछ और ही करना था, यही वजह थी कि खड़गपुर में धोनी ने क्रिकेट की अपनी एक नई दुनिया बसा ली, धोनी वहां रेलवे की टीम के लिए खेला करते थे।

     

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    कैसे हुआ टीम इंडिया में सलेक्शन

    2003-04 में कड़ी मेहनत के कारण धोनी को जिंबाब्वे और केन्या दौरे के लिए भारतीय ‘ए’ टीम में चुना गया। जिंबाब्वे के खिलाफ उन्होंने विकेट कीपर के तौर पर बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 7 कैच और 4 स्टंपिंग कीं। इस दौरे पर बल्लेबाजी करते हुए धोनी ने 7 मैचों में 362 रन भी बनाए। धोनी के कामयाब दौरे के बाद तत्कालीन टीम इंडिया के कप्तान सौरव गांगुली ने उन्हें टीम में लेने की सलाह दी। 2004 में धोनी को पहली बार टीम इंडिया में जगह मिली। हालांकि वह अपने पहले मैच में कोई खास कमाल नहीं कर पाए और जीरो पर आउट हो गए। इसके बाद भी कई मैचों में धोनी का बल्ला नहीं चला, लेकिन 2005 में पाकिस्तान के खिलाफ खेलते हुए धोनी ने 123 गेंदों पर 148 रनों की ऐसी तूफानी पारी खेली कि सभी इस खिलाड़ी के मुरीद बन गए। इसके कुछ दिनों बाद ही धोनी ने श्रीलंका के खिलाफ वनडे मैच में बल्लेबाजी करते हुए 183 रनों की पारी खेली जो किसी भी विकेटकीपर बल्लेबाज का अब तक का सर्वाधिक निजी स्कोर है। इसके बाद से एक दिवसीय मैचों में उन्हें ‘गेम-चेंजर’ माना जाने लगा।

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    2007 में बने वनडे के कप्तान

     

    धोनी पहली बार सितंबर, 2007 में भारत की ट्वेंटी-20 टीम के कप्तान बनाए गए। साल 2007 में ही उन्होंने पहली बार भारत की वनडे टीम की भी कमान संभाली। अगले साल यानी 2008 में पहली बार भारत की टेस्ट टीम के कप्तान बने। धोनी की अगुवाई में भारत ने 2007 में अंतरराष्ट्रीय ट्वेंटी-20 विश्व कप जीता। वहीं साल 2011 में वनडे विश्व कप भारत के नाम हुआ। धोनी आईपीएल में अपनी टीम चेन्नई सुपर किंग्स को साल 2010 और 2011 में जीत दिला चुके हैं। वे दुनिया के पहले कप्तान हैं जिनके नाम टी-20 वर्ल्ड कप, वनडे वर्ल्ड कप और चैंपियंस ट्रॉफी जीतने का रिकॉर्ड है।

     

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    धोनी को मिले सम्मान

    धोनी को कई सम्मान भी मिले हैं। 2008 में आईसीसी प्लेयर ऑफ द ईयर अवॉर्ड, राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार और 2009 में भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री पुरस्कार धोनी को मिला। धोनी देश के सबसे अमीर खिलाड़ी माने जाते हैं। इतना ही नहीं दुनिया के सबसे अमीर खिलाड़ियों की फेहरिस्त में फोर्ब्स पत्रिका ने उन्हें 16वें पायदान पर रखा है। धोनी की मौजूदा सालाना कमाई लगभग 200 करोड़ रुपये है।

     

    अचानक हुई शादी

    धोनी की खासियत क्रिकेट के मैदान पर ऐसे फैसले लेना है जिनसे विरोधी खेमा हैरान रह जाए और जब तक वो अपनी हैरानी की स्थिति से बाहर आए तब तक धोनी की टीम उसे धूल चटा चुकी हो, लेकिन क्रिकेट की दुनिया से इतर निजी जिंदगी में भी धोनी चौंकाने वाले फैसले के लिए ही जाने जाते हैं। कुछ ऐसे ही हुई थी धोनी की शादी। क्रिकेट की दुनिया की बारीक से बारीक खबरों पर नजर रखने वाले धुरंधर रिपोर्टरों को भी इसकी भनक नहीं लगी थी। खुद टीम इंडिया के साथी खिलाड़ियों तक को पता नहीं चला कि धोनी शादी कर रहे हैं और वो भी अपनी दोस्त साक्षी के साथ।

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    टेस्ट मैच से संन्यास

    क्रिकेट के मैदान पर अपने फैसलों से अक्सर चौंकाने वाले कप्तान धोनी का करियर जितना चमकदार रहा है, उतना ही चौंकाने वाला टेस्ट क्रिकेट से उनका संन्यास भी रहा है। 30 दिसंबर 2014 को धोनी ने मेलबर्न क्रिकेट मैदान पर ऑस्ट्रेलिया के साथ ड्रॉ हुए तीसरे टेस्ट मैच के बाद टेस्ट मैच से संन्यास लेने की घोषणा कर पूरे क्रिकेट जगत को हैरत में डाल दिया था। धोनी ने भारत के लिए 90 टेस्ट खेलते हुए 4,876 रन बनाए। 60 मैचों में भारतीय टीम का नेतृत्व किया और बतौर भारतीय कप्तान सबसे ज्यादा 27 जीत हासिल कीं। उनकी कप्तानी में भारतीय टीम टेस्ट रैंकिंग में शीर्ष पर पहुंचने में कामयाब रही। विदेशी पिचों पर बतौर कप्तान धोनी का प्रदर्शन बहुत अच्छा नहीं रहा। विदेश में खेले 30 टेस्ट में धोनी के नेतृत्व में भारतीय टीम को केवल छह जीत मिलीं, जबकि 15 में उसे हार का सामना करना पड़ा।

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    वर्ल्ड कप 2015

    वर्ल्ड कप 2015 में सेमीफाइनल से पहले भारत ने लगातार सात मैच जीते जिससे लोगों को यही भरोसा था कि ये वर्ल्ड कप भी भारत के नाम होगा, लेकिन पूल मैचों और क्वार्टर फाइनल में जबरदस्त प्रदर्शन करने वाली भारतीय टीम सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलियाई टीम का तिलिस्म नहीं तोड़ पाई और उसे हार का सामना करना पड़ा। जिसके लिए टीम इंडिया को काफी आलोचना झेलनी पड़ी।

     

    वनडे की कप्तानी छोड़ने की पेशकश

    टीम इंडिया को वनडे सीरीज में बांग्लादेश के खिलाफ 2-1 की शर्मनाक हार झेलनी पड़ी। पहली बार बांग्लादेश ने भारत के खिलाफ कोई सीरीज जीती है। यही नहीं भारत के खिलाफ लगातार 2 मैचों में जीत भी मेजबान टीम को पहली बार मिली है। इस हार के बाद धोनी ने कप्तानी छोड़ने के संकेत दिए हैं। धोनी का ये भी कहना है कि अगर आलोचकों को ये लगता है कि टीम का नुकसान उनकी कप्तानी के चलते हो रहा है तो उन्हें ये पद नहीं चाहिए क्योंकि भारत के लिए जीत ज्यादा मायने रखती है, ना कि ये बात कि कप्तान कौन है।

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