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नशा छुड़ाओ व पुर्नवास केंद्र में मरीज का किया जाता है नि:शुल्क इलाज: डिप्टी कमिश्नर

नशा छुड़ाओ व पुर्नवास केंद्र में मरीज का किया जाता है नि:शुल्क इलाज: डिप्टी कमिश्नर

होशियारपुर (रुपिंदर ) प्रदेश में नशे के खिलाफ मुख्य मंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार की ओर से चलाए गए अभियान को जिला होशियारपुर में सफलतापूर्वक लागू किया जा रहा है, जिसके चलते नौजवानों को नशे के चंगुल से बाहर निकाला जा रहा है। यह विचार रखते हुए डिप्टी कमिश्नर श्रीमती ईशा कालिया ने बताया कि नशे के खिलाफ किए जा रहे प्रयासों के अंतर्गत जिला प्रशासन की ओर से यह सप्ताह नशा विरोधी सप्ताह के तौर पर मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार के नशे के खिलाफ छेड़े अभियान ने कई नौजवानों को नई दिशा दी है।  इसी अभियान के अंतर्गत होशियारपुर के एक गांव के 29 वर्षीय नौजवान ने नशे को हमेशा के लिए छोड़ कर नई जिंदगी की शुरु आत की है। उन्होंने बताया कि जिले में अलग-अलग स्थानों पर खुले ओ.ओ.ए.टी. क्लीनिक, नशा छुड़ाओ एवं पुर्नवास केंद्र में मरीजों को भेजा जा रहा है ताकि वे नशा छोड़ आम जिंदगी व्यतीत कर सकें।
डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि जिले को नशामुक्त  करने के लिए सरकार की ओर दो नशा छुड़ाओ केंद्र सिविल अस्पताल होशियारपुर व सिविल अस्पताल दसूहा में चलाए जा रहे हैं, इसके अलावा 5 प्राईवेट नशा छुड़ाओ केंद्र है , वहीं एक नशामुक्ति  पुर्नवास केंद्र मोहल्ला फतेहगढ़ मेें भी चलाया जा रहा है। इन केंद्रों में हर तरह के नशे के मरीजों को 1-3 महीने तक दाखिल कर दवाईयां, काउंसलिंग व अन्य गतिविधियों से नि:शुल्क इलाज किया जा रहा है। डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि पंजाब सरकार की तरफ से शुरू की बेहतरीन अभियान मिशन तंदुरु स्त पंजाब के अंतर्गत डैपो व बडी प्रोग्राम के अंतर्गत नशे पर काफी हद तक नकेल लगाई जा चुकी है। श्रीमती ईशा कालिया ने बतााया कि गांवों में नशा करने वाले व्यक्तियों की पहचान करने उन्हें नशा छुड़ाओ केंद्रों के बारे में जागरूक किया जा रहा है, जिससे वह अपना इलाज करवा  सकें। उन्होंने कहा कि नशा छुड़ाओ व पुर्नवास केंद्र में मरीजा का नि:शुल्क इलाज किया जाता है।
नशा छुड़ाओ व पुर्नवास केंद्र से इलाज करवा कर नशा छोड़ चुका 29 वर्षीय कपिल (काल्पनिक नाम) ने 22 वर्ष की आयु में पहली बार नशा किया था। उस समय वह नैटवर्किंग का बिजनेस करता था और 25 हजार रु पये महीना कमा लेता था। दोस्तों के साथ शौक के तौर पर किए नशे ने उसे अपना गुलाम बना लिया और रोजाना आठ इंजेक्शन नशे के लेने लग पड़ा। रोज के नशे का उसका खर्चा 4 हजार  रु पये तक आने लगा और यह सिलसिला तकरीबन डेढ़ वर्ष तक चला।
कपिल की अब सारी कमाई नशे में जाने लगी, काम में मन न लगने से धीरे-धीरे कमाई भी बंद होने लगी। अक्टूबर 2015 में कपिल ने नशा छुड़ाओ व पुर्नवास केंद्र होशियारपुर में दाखिला ले लिया और इस संस्था में वह तकरीबन एक महीना दाखिल रहा। यहां दाखिल रहने के बाद कपिल की नशे की लत खत्म हो गई और वह विदेश चला गया। मार्च 2018 में वह विदेश से वापिस आ गया और यहां पर नौकरी शुरु  कर दी। अब कपिल पूरी तरह से नशा छोड़ चुका है और अपने परिवार के साथ खुशी के साथ अपना जीवन व्यतीत कर रहा है। कपिल ने बताया कि पंजाब सरकार के नशा छुड़ाओ व पुर्नवास केंद्र ने उसे नई जिंदगी दी है। उसने अपनी जिंदगी में बहुत उतार चढ़ाव देखे हैं लेकिन अब अपने अतीत को भूल कर आगे बढ़ रहा है। नौजवानों को अपील करते हुए कपिल ने कहा कि नशे की आदत पडऩे के बाद सिर्फ पछतावा ही रह जाता है, इस लिए नशे से दूर रहने में ही भलाई है, अगर कोई दोस्त या जानकार इस बीमारी से पीडि़त है तो उसे इलाज के लिए प्रेरित करें।

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