हेलीकॉप्टर खरीद घोटाले में तत्कालीन प्रधानमंत्री कार्यालय की भूमिका की जांच होनी चाहिए-चौधरी

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    होशियारपुर:अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर खरीद घोटाले में तत्कालीन प्रधानमंत्री कार्यालय की भूमिका की जांच होनी चाहिए क्योंकि पूर्व वायु सेना अध्यक्ष एस.पी त्यागी ने वकील के माध्यम से कोर्ट को बताया है कि हेलीकॉप्टर खरीद का निर्णय उन्होंने अकेले नहीं लिया था। इसकी जानकारी तत्कालीन प्रधानमंत्री कार्यालय को भी थी। उक्त बात डिफैंस कमेटी के पूर्व चेयरमैन स्कवाड्रन लीडर कमल चौधरी ने आज जारी एक बक्तव्य में कही। उन्होने कहा कि एस.पी त्यागी गिरफ्तारी से पूर्व सैनिकों में रोष पाया जा रहा है। एेसा दिखाई देता है कि कुछ व्यूरोक्रेटस व राजनीतज्ञों को बचाने के लिए उन्हे वलि का बकरा बनाया जा रहा है। उन्होने कहा कि दिलचस्प बात है कि पूर्व बायु सेना प्रमुख एस.पी.त्यागी 2007 में सेवा मुक्त हुए परंतु वीवीआईपी हैलीकाप्टर की सप्लाई का आर्डर 2010 में दिया गया। इसमें त्यागी की प्रमुख भूमिका कैसे हो सकती है । सी.वी.आई का यह कहना भी समझ से बाहर है कि सप्लाई के मापदंड़ों में पूर्व वायु सेना अध्यक्ष एसपी त्यागी ने ढील दी थी जबकि बह एेसा कर नही सकते थे। कैग की रिपोर्ट भी इस तरफ इशारा करती है । उन्होने कहा कि खुद पूर्व वायु सेना अध्यक्ष एस.पी त्यागी ने इस साल के शुरु में कहा था कि सी.बी.आई व इंफोर्समैंट डायरैक्टोरेट उनसे 60 घंटो की पूछताछ में कुछ भी सावित न कर सका परंतु उनसे पूछताछ की तस्वीरे जरुर जारी होती रही तांकि लोगों को लगे की पूर्व वायु सेना अध्यक्ष एस.पी त्यागी की पूरे मामले में कोई न कोई भूमिका जरुर है। उन्होने कहा कि सेना का उच्च अधिकारी कभी भी देश के हितों के साथ खिलवाड नही कर सकता। पूर्व वायु सेना अध्यक्ष एस.पी त्यागी के जिन पारिवारिक सदस्यों की पूरे मामले में भूमिका की बात की जा रही है उनके साथ भी पूर्व वायु सेना अध्यक्ष एस.पी त्यागी के संवंध कभी मधुर नही रहे है एेसे में बह उन्हे लाभ पहुंचाने की बात भी कैसे सोच सकते है।

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