माया नागिन की भांति है – साध्वी श्वेता

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    होशियारपुर । दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के गौतम नगर आश्रम में प्रवचन करते हुए श्री आशुतोष महाराज जी कि शिष्या साध्वी श्वेता भारती जी ने अपने विचारो मेंं कहा कि आज का मानव माया में जकड़ा होने के कारण अपने लक्ष्य से भटक गया है। संत कहते है माया तो नागिन की भांति होती है , जैसे नागिन अपने बच्चों को ही खा जाती है। ऐसे ही ये माया है जो मानव इसका निरंतर चिंतन करता है । माया उसी को ही खा जाती है। प्रश्न यह है कि हम इस माया से कैसे बच सकते है, रहना तो इसी माया के बीच में है। संत इसका उत्तर देते है कि मानव यदि इस माया से बचना चाहता है तो ऐसे रहो जैसे कमल का फूल कीचड़ में रहता है। वह अपना पोषण तो कीचड़ में ही करता है पर नाता सूरज के साथ जोडकर रखता है। ऐसे ही तू भी इस माया के कीचड़ में भले ही रहे पर तेरा मन इस माया मे लिप्त ना हो पाए इसको ईश्वर के साथ जोड ले । ईश्वर से कैसे जुड सकते है। जब जीवन में कोई पूर्ण सदगुरू का आगमन होगा तभी हम ईश्वर से जुड़ सकते है सदगुरू ही हमारे घाट में ईश्वर के निराकार रूप को प्रकट करते है तो हम ईश्वर का र्दशन करते हुए मायावी संसार में रहकर भी माया से अलग रह सकते है संतो की तरह यही जीवन का लक्ष्य है।

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