मानव का जीवन एक संघर्ष का क्षेत्र -साध्वी भारती

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    दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा आश्रम गौतम नगर होशियारपुर  में सप्ताहिक सतसंग का आयोजन किया गया। जिसमें अपने विचारों को रखते हुए संस्थान के संस्थापक एवं संचालक श्री आशुतोष महाराज जी के परम शिष्या साध्वी विरांगना भारती जी ने उपस्थित प्रभु प्रेमियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि मानव का जीवन एक संघर्ष का क्षेत्र है। एक प्रकार से युद्ध का मैदान है। जिसमें वासनाएँ,कुविचार,राग-द्वेष आदि हमारे परमशत्रु हैं। हमें सद्मार्ग से हटाने का प्रयास करते रहते है। अत एक सच्चा जीवन जीने के लिए हमें इनके साथ युद्ध करना होता है। जिस प्रकार एक योद्धा जब युद्ध के मैदान में जाता है तो हमेशा अपने अस्त्र-शस्त्र तैयार करके ही जाता है। हमनें अपने प्राचीन काल के योद्धाओं के चित्र तो अवश्य ही देखें होगे। उनके हाथ में धनुष-बाण तो होता ही है और तलवार के साथ ढाल भी हुआ करती है। ढाल जो एक योद्धा की हमेंशा रक्षा करती है। यह ढाल हम तभी प्रयोग में ला सकते है यदि हमारे अन्त करण में ईश्वर के प्रति वैराग्य और प्रेम के भाव होगे क्योकि यदि हमारे मन में प्रभु के लिए वैराग्य नही है तो हम विष्य वासनाओं में ही अपने जीवन का निरवाह करते रहते है और कभी परमात्मा की ओर बढ़ ही नही पाते।

    साध्वी जी ने अपने विचारों में आगे बताया कि प्रश्न ही यही पैदा होता है कि प्रभु के प्रति हमारे भीतर वैराग्य उत्पंन कैसे हो? क्योकि आज मानव अपनें जीवन को संसारिक दौड ही लगा रहा है जिसमें उसे अपने आप का भी भान नही है। ईश्वर के प्रति ऋद्धा,प्रेम,त्याग,वैराग्य तो केवल तभी संभव होगा यदि हमारे जीवन में एक संत आएगे जो स्वयं प्रभु से प्रेम एवं वैराग्य से जुडे होगे और हमें भी प्रभु का दर्शन हमारे अन्तकरण में करवा देगे। तभी हमारें भीतर प्रभु को पाने की चाहत बढेगी क्योकि किसी को बिना देखें आप उसके लिए तडप पैदा नही हो सकती। इसी प्रकार प्रभु का दीदार पाकर ही हमारेें भीतर वैराग्य उत्पंन हो सकता है।

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