मानक ज्ञान प्राप्ति का मूल आधार है मानक पुस्तकें -विशिष्ट

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    होशियारपुर। पंजाब के निजी स्कूलों की तरफ से पढ़ाई जा रही निजी प्रकाशकों की गैर जरूरी और गैर मानक पाठ पुस्तकें, गैर जरूरी फीसों, दाखले और ओर की जा रही धक्केशाही खिलाफ 04 जुलाई से डी.सी. द$फतर जालंधर के सामने धारावाहिक धरना लगाई बैठी जालंधर की ही एक निजी स्कूल की नौवीं कक्षा की छात्रा नोबल के संघर्ष को उस समय पर ओर बल मिला जब प्रसिद्ध समाज सेवीं, होशियारपुर -जालंधर जमीन अधिकरण में हुए घोटाले और बाल विवाह जैसे मुद्दे को बेपर्दा करने वाले राज स्तरीय संस्था आर.टी.आई. अवेयरनैस फोरम पंजाब के संस्थापक चेयरमैन राजीव विशिष्ट ने छात्रा नोबल को मिल कर जहाँ उसके संघर्ष का समर्थन किया वहीं संकेतक रूप के साथ धरने में शामिल हो कर प्रशासन खिला$फ विरोध भी दर्ज करवाया।
    चेयरमैन राजीव विशिष्ट ने अपने संबोधन में संघर्षी छात्रा नोबल के इस कार्य और हौसलें की मूरत की प्रशंसा करते कहा कि यह सामाजिक बदलाव का आगाज है जब निजी स्कूलों की इस धक्के शाही के साथ सीधे रूप के साथ प्रभावित होने वाला विद्यार्थी वर्ग इसके विरुद्ध खड़ा हो गया है और नोबल उस वर्ग की नुमायंदगी कर रही है। उसने सी.बी.एस.ई. से मान्यता प्राप्त स्कूलों में नियमों और सरकार की हिदायतें अनुसार एन.सी.ई.आर.टी. की पुस्तकों के स्थान पर निजी प्रकाशनों की पुस्तकें लगवाना विद्यार्थियों के मानक शिक्षा प्राप्ति के बुनियादी अधिकार का हनन है समूह स्वयसेवीं जत्थेबंदियां को एक मंच पर आ कर संघर्ष करने और इस मुद्दे पर लोगों की एक राय बनाने की अपील भी की। राजीव विशिष्ट ने कहा कि हमारी संस्था पिछले तीन सालों से लगातार निजी स्कूलों में सबंधित बोर्ड द्वारा सुझाई गई पुस्तकें लगवाने हित संघर्षमई है और होशियारपुर में इस पक्ष से का असरदार काम हुआ है। श्री विशिष्ट ने इस सम्बन्धित संस्था की तरफ से केस स्टडी के नतीजे प्रसारित करते हुए बताया कि आम तौर और संकुचित वित्तीय लाभ के प्रभाव नीचे कुछ निजी स्कूलों में एन.सी.ई.आर.टी. या किसी भी ओर सबंधित बोर्ड की पुस्तकें पहली जमात से लगवाउण की जगह और आठवीं जमात से ही लगवाईआं जातीं हैं। श्री विशिष्ट ने बताया कि इस मुद्दे और विचार चर्चा दौरान कुछ प्रशासनिक आधिकारियों ने बताया कि सिवल सेवाओं की परीक्षा की तैयारी हित छटी से बारकवीं जमात तक की ऐन.सी.ई.आर.टी. की पुस्तकें सब से अधिक सहायक होती हैं। एक प्रशासनिक अधिकारी ने तो यहाँ तक कहा कि उसने एक लोहे के बक्से में इनें पुस्तकें को आज भी संभाल कर रखा हुआ है।

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