प्रत्येक मानव जीवन मेें हर कदम पर स्वयं को एक दोराहे पर पाता है-साध्वी प्रीत

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    downloadदिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान आश्रम की ओर से गौतम नगर आश्रम में करवाए गए धार्मिक कार्यक्रम में प्रवचन करते हुए श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी प्रीत भारती जी ने कहा कि प्रत्येक मानव जीवन मेें हर कदम पर स्वयं को एक दोराहे पर पाता है। जिसे शास्न्न व गन्थों में श्रेय मार्ग सर्व कल्याणकारी धर्मसंगत मार्ग व प्रेय मार्ग-अर्थात ,ऐन्द्रिय सुखों की लालसा से भरपूर स्वार्थ व विनाश से भरपूर मार्ग कहते हैं। एक आत्मा का मार्ग है व दूसरा मन का । एक सुलझन की ओर ले जाता है एक उल्झन की ओर। इन्ही के वीच फ ंसकर सही चयन न कर पाने की दशा ही तनाव, उदासी व क्षोभ का कारण है। जिससे अनेक मनोविज्ञानिक व्याधियां जन्मती है। यही आधुनिक समाज की समस्या है। क्योंकि इंसान सुख-शान्ति की तालाश बाहर करता है। लेकिन शान्ति मनुष्य के अंदर है। वह भ्रमित हो जाता है। लेकिन जब वह किसी ऐसे महापुरूष की शरण में पहुँचता है जो उसे उसके भीतर जाने का मार्ग अर्थात उसे दिव्य नेन्न प्रदान कर देता है तो वह आत्मा के कल्याण के लिए चल पड़ता हैे। उन्होंने कहा कि अगर हम स्वयं को पहचानें भीतर उठने वाली अंतरात्मा की चीत्कार को सुने,उस पर अमल करे तो निश्चय ही समाधान हो जाएगा।अर्जुन भी इसी दोराहे पर अपने आप का पाता है,वह यह निर्र्णय नहीं कर पा रहा था कि वह अपने सगे संबधियों से कैसे युद्घ करे पर उसका समाधान उनके गुरू भगवान श्री कृष्ण युद्घ क्षेन्न में उसे दिव्य नेन्न प्रदान कर करते हैं। आज भी इंसान को आत्म ज्ञान की जरूरत है तंा कि वह श्रेय मार्ग को प्राप्त करे । इसके लिए हमें भी किसी तत्वदर्शी के पास जाना होगा और उससे आत्मज्ञान भाव ईश्वर दर्शन की मांग करनी होगी। हमारे सभी धार्मिक शास्न्न इसी वात को कहते हैं।

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