पीएम के लिए खाना लेकर पहुंचे कार्यकर्ता, हुए निराश

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    पीएम मोदी को अपने घर का खाना खिलाने की कार्यकर्ताओं की हसरत पूरी नहीं हो पाई। बीजेपी ने कार्यकर्ताओं से खाने का पैकेट लाने का संदेश यह कहकर दिया था कि पीएम किसी के भी साथ खाना साझा कर सकते हैं। पीएम के साथ भोजन साझा करने का सपना संजोए हजारों कार्यकर्ता अपने घर से अपनी इच्छा व शक्ति के हिसाब से पकवान पैक कराकर पहुंचे।

    महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं का तो भोजन का पैकेट ले जाने को लेकर अलग ही उत्साह था। पुरुष कार्यकर्ता मां-बहन या पत्नी से खास पकवान बनवाकर भी लेकर पहुंचे थे। कार्यकर्ताओं से संवाद के दौरान जैसे ही पीएम मोदी ने कहा ‘मैं भी कार्यकर्ता हूं। टिफिन लेकर आया हूं। खाना खाना और खिलाना यह बीजेपी का परिवार भाव है राजनीति नही।’ यह सुनकर तालियां तो खूब बजी लेकिन हजारों की हसरत भी धाराशायी हो गयी।

    श्री मोदी ने अपना खाना खाया सुरक्षा की दृष्टि से यह तो बेहतर है लेकिन कार्यकर्ताओं का लाया हुआ खाना जब नहीं खाना था तो इस नोट बंदी की कड़की में लोगों का पैसा क्यों बर्बाद करवाया मोदी जी को आदत है चूना लगाने की नोट बंदी कर के सारे देश को चूना लगाया है चलो भक्तों लोग एक चुना और कर लें

    पीएम ने डीरेका परिसर में वाराणसी संसदीय क्षेत्र के 35 हजार से ज्‍यादा बूथ लेवल कार्यकर्ताओं के बीच लगभग डेढ़ घंटे का समय कार्यकर्ताओं के बीच व्यतीत किया। मीडिया को दूर रखकर पहली बार कार्यकर्ताओं से रूबरू हो रहे मोदी के इस कार्यक्रम में भोजन कार्यकर्ताओं की ‘पोटली’ से ही करने का जो संदेश प्रचारित किया गया था, वह हवा हो गया।

    इस सम्मेलन के बाद मोदी सुरक्षा के लिए बने डी के अंदर अपना टिफिन खोला तो पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य के साथ पार्टी के महासचिव सुनील बंसल साझीदार बने। पीएम के टिफिन खुलने के बाद वाराणसी शहर दक्षिणी, कैंट, उत्तरी, सेवापुर व रोहनिया विधानसभा क्षेत्रों के जो बूथ कार्यकर्ता अपने घरों से पूड़ी-सब्‍जी, अचार और एक मिठाई लेकर पहुंचे थे, वहां मायूस दिखे।

    कुछ अपनी पोटली मैदान में ही बैठकर ग्रहण किए तो कुछ किसी को थमाकर आगे बढ़ गये। चौंकने की बात यह है पार्टी की ओर से भोजन ले जाने के लिए पारदर्शी कैरी बैग कार्यकर्ताओं को उपलब्‍ध कराया गया है। इसके साथ भोजन करने के लिए तिरूअनंतपुरम (केरल) से मंगाया गया खास दोना (पत्तल) भी साथ था। कहा गया था कि पीएम मोदी अचानक किसी कार्यकर्ता की सीट पर पहुंचकर गुफ्तगू करेंगे,फिर उसकी पोटली खोल पूड़ी-सब्‍जी का स्‍वाद चखेंगे। ऐसा हो नहीं सका।

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