पंजाब भाजपा ने राज्यपाल से राणा गुरजीत के खिलाफ मांगी सीबीआई, ईडी व एनआईए जांच

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    JANGATHA/ चंडीगढ़  : पंजाब के रेत खनन छदम बोली मामले में कैबिनेट मंत्री राणा गुरजीत के अलावा अमित बहादुर और बलराज सिंह के खिलाफ  सीबीआई प्रवर्तन निदेशालय आयकर विभाग और एनआईए द्वारा विभिन्न मामले दर्ज किए जाने की मांग को लेकर भारतीय जनता पार्टी पंजाब के नेताओं ने मंगलवार को चंडीगढ़ में पंजाब के माननीय राज्यपाल से मुलाकात की। पंजाब के पूर्व कैबिनेट मंत्री और पंजाब भाजपा के पूर्व अध्यक्ष मदन मोहन मित्तल, पार्टी के वर्तमान प्रदेश उपाध्यक्ष हरजीत सिंह ग्रेवाल, प्रदेश उपाध्यक्ष इकबाल सिंह लालपुरा, महासचिव मंजीत सिंह राय, प्रदेश सचिव विनीत जोशी, और प्रदेश सचिव विजय पुरी के प्रतिनिधिमंडल ने इस दौरान मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह द्वारा गठित तथाकथित न्यायिक आयोग को पूर्णतया नकार दिया है। भाजपा नेताओं ने कहा है कि पंजाब में कैबिनेट मंत्री का ओहदा संभाल रहे राणा गुरजीत अपने पद का दुरुपयोग कर जांच प्रभावित कर सकते हैं। पंजाब सीएम के आदेशानुसार गठित न्यायिक आयोग को लेकर राज्यपाल से अपनी असंतुष्टि जताने के बाद भाजपा नेता मित्तल व विनीत जोशी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि ये पूर्णतया स्पष्ट है कि कैबिनेट मंत्री राणा गुरजीत सिंह ने रेत खनन व्यवसाय पर कब्जा करने के लिए अपने कर्मचारियों की आड़ लेकर न सिर्फ आर्थिक लाभ उठाने की कोशिश की बल्कि सरकारी मशीनरी और अपने पद का दुरुपयोग भी जमकर कर रहे हैं। इसीलिए उनके खिलाफ भ्रष्टाचार, विश्वासघात, फर्जी बोली कराने जैसे मामले बनते हैं। इससे भी ज्यादा ये भारतीय संविधान के नाम पर लिए गए पद ग्रहण शपथ के उल्लंघन का मामला बनता है। हरजीत सिंह ग्रेवाल ने कहा कि ये मामला बेनामी लेन-देन का भी बनता है क्योंकि व्यक्ति विशेष ने मामूली आय के बावजूद सरकारी खजाने में करोड़ों रुपए जमा कराए। बेनामी लेन-देन का जरिया मनी लॉन्ड्रिंग, हवाला लेन-देन की तरफ ले जाता है इसीलिए बड़े पैमाने पर विभिन्न लोगों द्वारा संचालित नगद राशि, राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। विनीत जोशी ने कहा कि कोई भी जांच आयोग, जिसकी अध्यक्षता मानयीय हाईकोर्ट के वर्तमान जज नहीं कर रहे हैं, उसे न्यायिक आयोग नहीं कहा जा सकता है। इसीलिए पंजाब के मुख्यमंत्री ने जिस आयोग का गठन किया है वो कमीशन ऑफ  इनक्वायरी एक्ट के तहत गठित एक साधारण आयोग है और इसे न्यायिक आयोग का नाम देकर मुख्यमंत्री पंजाब के लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। साथ ही साथ पंजाब के मुख्यमंत्री द्वारा मामले में जांच आयोग के गठन का आदेशए समाचार पत्रों में छपे आरोपों की सत्यता को प्रतीकात्मक स्वीकृति देता है।

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