धार्मिक कार्यक्रम में बाउंसर: गरीबों की अनदेखी, अमीरों की जयजयकार

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    धार्मिक कार्यक्रम में बाउंसर: गरीबों की अनदेखी, अमीरों की जयजयकार
    -निशुल्क सेवा करने वाली संस्थाओं को सेवा का मौका देने के स्थान पर बाउंसरों पर लुटाया जा रहा है जनता के दान का पैसा-
    होशियारपुर। होशियारपुर संतों की नगरी है और रहेगी इसमें कोई दो राय नहीं है, इसीलिए यहां के लोग इतने धार्मिक हैं कि यहां पर आए दिन कोई न कोई धार्मिक आयोजन होता ही रहता है। पिछले दिनों होशियारपुर में एक धार्मिक कार्यक्रम हुआ, जिसमें पहुंचे संत की निगाह वी.वी.आई.पी. और वी.आई.पी. पर रहती थी कि कितने वी.आई.पी. कार्यक्रम में पहुंचे तो एक अन्य आयोजन में आयोजकों की नजऱ वी.वी.आई.पी. और वी.आई.पी. पर रहती है तथा यह भी ध्यान रखा जाता है कि कितना मोटा दान देने वाले को कौन सा स्थान प्रदान करना है। इतना ही नहीं धार्मिक कार्यक्रमों में श्रद्धालुओं को पंडाल में बिठाने तथा व्यवस्था में सहयोग देने की निशुक्ल सेवाएं देने वाली संस्थाओं को छोड़ जनता से दान के रुप में इकट्ठा किया पैसा बाउंसरों पर लुटाया जा रहा है। ऐसा प्रतीत होता है कि मानो यह कोई धार्मिक कार्यक्रम नहीं बल्कि कोई अखाड़ा हो जहां पर भीड़ को कंट्रोल करने के लिए बाउंसरों को खड़ा कर रखा हो। सूत्रों की माने तो बाउंसर उसी का हुक्म मानते हैं जिससे उन्हें पैसे मिलते हैं। इतना ही नहीं सुनने में तो यह भी आया है कि धार्मिक कार्यक्रम में पहुंचे बाउंसरों के रहने और खाने-पीने की व्यवस्था भी आयोजकों द्वारा की गई है तथा उनके द्वारा खूब इंज्वाय किया जा रहा है। इसके साथ-साथ होशियारपुर निवासियों के कार्यक्रम में पहुंचने पर शहरियों/श्रद्धालुओं के साथ कैसा व्यवहार करना है उससे भी उन्हें कोई लेना देना नहीं है, क्योंकि सभी बाउंसर बाहरी जिलों से संबंधित हैं। इसलिए उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता कि वे किसके साथ कैसा व्यवहार कर रहे हैं।
    सूत्रों से यह भी पता चला है कि उक्त कार्यक्रम में आयोजकों की आपस में भी काफी खटपट चल रही है तथा कुछेक को तो कार्यक्रम दौरान ही बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है ताकि वे हिसाब किताब ही न पूछ सकें। इसके अलावा कुछेक महिला सदस्यों में भी रोष की लहर है तथा संस्था को तानाशाहों की कमेटी कहकर संबोधित करने से भी परहेज नहीं कर रही। अगर धार्मिक कार्यक्रमों में ऐसा होगा तो यहां की धार्मिक मर्यादा का भंग होना लगभग तय ही है। सूत्रों का तो यह भी कहना है कि मोटा दान दाने वालों की खूब आओ भक्त हो रही है और गरीब व्यक्ति को अनदेखा किया जा रहा है और किसको कहा बिठाना है और किसका आदेश मानना है और किसका नहीं इसके लिए एक महाशय का हुक्म ही सर्वोपरि है।
    संतों के कार्यक्रम में कहीं वी.आई.पीज. का चक्कर तो कहीं संतों का वी.आई.पीज. के प्रति मोह इस बात की तरफ इशारा करता है कि कहीं न कहीं धार्मिक मर्यादा का संदेश देने व सुनने वाले खुद ही तो नहीं मर्यादा से भटक रहे जिसके चलते आम श्रद्धालु के लिए यह समझना मुश्किल हो गया है कि वे किसके लड़ लगकर भव सागर से पार हो सकता है। फिलहाल तो उक्त कार्यक्रम में बाउंसरों को लेकर शहर निवासियों के मन में काफी संशय की स्थिति पैदा हो रही है कि भगवान के कार्यक्रम में भी. . . ?????

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