दोआबे का दर्द-इक वारी चख के तां देख, ऐथे बैठे बैठे बार (विदेशों) दी सैर कर आउगा।

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    Monika Sharma / माहिलपुर–पंजाब का संपन्न इलाका दोआबा है। यह सतलुज और व्यास नदी के बीच का इलाका है। यहां गेहूं की पैदावार ज्यादा है। इसके तहत जालंधर, होशियारपुर, नवांशहर, कपूरथला, फगवाड़ा जिले आते हैं। होशियारपुर जिले के माहिलपुर, बाड़िया,चब्बेवाल, गढ़शंकर, कोट फतूही आर्थिक रूप से यह संपन्न इलाका है। इसका कारण यह है कि राज्य में यहीं के सबसे ज्यादा लोग विदेशों में रहते हैं। विदेशों में रहने वाले लोग या तो अपने परिवार को पैसे भेजते हैं या फिर परिवार के अन्य सदस्यों को अपने साथ विदेश ले जाते हैं। संपन्नता का स्याह पहलू यह है कि यहां के लोग शौकिया ड्रग्स के लती हैं। यहां भुक्की और चिट्टा (हेरोईन) का इस्तेमाल ज्यादा है। ये ड्रग्स को अपनी संस्कृति और रूतबे का हिस्सा मानते हैं। यहां लड़कियों की भ्रूण हत्या के मामले भी ज्यादा हैं। माहिलपुर के रहने वाले जसबीर सिंह(बदला हुआ नाम) ने बताया, ‘मैंने शौकिया तौर पर नशा करना शुरू किया था। मेरे दोस्त हेरोईन का सेवन करते थे। एक दिन मेरे एक दोस्त ने कहा कि ‘इक वारी चख के तां देख, ऐथे बैठे बैठे बार (विदेशों) दी सैर कर आउगा। नाल मजा शराब तों दुगना मिलूगा।’ मतलब चखेगा तो बहुत मजा आएगा। बैठे-बैठे विदेशों की सैर हो जाएगी। ऐसे ही उसने मुझे आदत डाल दी।’ यह पूछने पर कि उसे कभी पैसे की कमी महसूस नहीं हुई तो उसने बताया कि ‘हमारे पास 15 एकड़ जमीन है। उसे ठेके पर दे देते हैं जिससे 6 लाख रुपये सालाना आ जाता है। इसके अलावा कुछ दुकानें किराये पर दे रखी हैं। उनका भी किराया आता है।’ वह रोजाना एक ग्राम सफेद नशा लेता है जो करीब 1 हजार रुपये की पड़ती है।

    सब जगह नशे के निशान ही दिखाई देते है….
    अब तो नहर का किनारा हो जा सरकारी स्कूल अस्पताल का बाथरूम जा फिर वीरान इलाके में कोई पुरानी ईमारत वहा पर इंजेक्शन लगाने की नीडल, खांसी में इस्तेमाल होने वाली दवा की बोतलें जा दर्दनिवारक गोलियों के पत्ते इधर उधर विखरे मिल जाते है।
    इससे पता लगता है कि दोआबा की युवा पीढ़ी नशे पर कितना खर्च करती है।
    सरकार कोई भी हो ये व्यपार वेरोकटोक चलता रहता है….
    सरकार आकाली बीजेपी की हो जा कांग्रेस की बस मोहरे बदलते हैं खिलाड़ी नही।

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