दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा विलक्षण योग कार्यक्रम का आयोजन

    0
    9

    दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा विलक्षण योग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के तहत संस्थान के संस्थापक एवं संचालक श्री आशुतोष महाराज जी के शिष्य स्वामी विज्ञानानंद जी ने अपने उदगार व्यक्त करते हुए कहा कि परिर्वतन संसार का नियम है। इंसान अपने जीवन के दौरान अनेक प्रकार के उतार चढाव से गुजरता है। कभी स्वयं को स्वस्थ तो कभी कभी अस्वस्थ महसूस करने के कारण मानव हताश नजर आता है। वह इसी उतार चढाव के दौरान इंसान अपने जीवन में कुछ गलतियों को कर जाता है। जिसके परिणाम स्वरूप वह अपने जीवन की दशा को गलत दिशा का चयन करके बर्बाद कर लेता है। इसका मुखय कारण है कि इंसान अपने मन का गुलाम होकर सभी कार्यो को करता है। इस मन के कारण ही इंसान अपने जीवन के दौरान बहुत कुछ न चाहते हुए भी अपनी सेहत अपने धन अपने यश स6मान आदि को खो देता है।
    स्वामी जी ने कहा कि महर्षि पतंजलि ने योग सुत्र की रचना इसीलिए ही की है कि एक इंसान योग का सहारा लेकर अपने शरीर व मन को स्वस्थ कर सकें। अगर शरीर स्वस्थ है तो प्रत्येक कार्य में इंसान अपना स6मूर्ण योगदान दे पाएगा। हमारे शास्त्र भी कहते है ।।पहला सुख निरोगी काया।। अगर हमारा शरीर स्वस्थ है परन्तु मन में हीन भावना है बुरे विचार है निराशा है तो भी इंसान सुखी व शांत नहीं रह सकता है अत: योग के माध्यम से हम अपने शरीर के साथ साथ अपने मन को 5ाी नियत्रिंत कर सकते है परन्तु यह त5ाी सं5ाव है जब योगाचार्य स्वयं योग की प्रत्येक अवस्था को सही ढंग से जानता हो और तत्पश्चात वह उसका ज्ञान अपने शिष्य को दे तभी पूर्ण लाभ हो पाएगा।

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here