दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान आश्रम में गुरू पुर्णीमा का त्योहार मनाया

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    676ab4d2-6019-486d-91db-7f7ac9ea2c50दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान आश्रम  में गुरू पुर्णीमा का त्योहार मनाया गया। इस अवसर पर श्री आशुतोष महाराज जी की साघ्वी शिष्या द्धारा सतसंग प्रवचन व भजन कीरतन प्रस्तुत किया गया। साध्वी अक्षदा भारती जी ने गुरू और शिष्य के अलौकिक प्रेम को समर्पित ऐतिहासिक प्रसंग सुनाए।साघ्वी जी ने कहा कि श्री वेद व्यास जी ने 18 पुराणों की रचना की लेकिन वह अशांत थे। उनके जीवन में जब गुरू नारद जी आते है तो उनको परमात्मा का साक्षात्कार करवा के परम शान्ति से जोड देते है। इसी दिन वेद व्यास जी का जन्म व इसी दिन उनको ज्ञान मिला था और इसी दिन यह त्योहार मनाया जाता है।आगे साध्वी जी ने कहा कि भारतवर्ष में गुरू शिष्य प्रेम की असंख्य गाथाएं मिलती है, जो हमें भी अकित मार्ग पर अग्रसर होने की प्रेरना देती है। प्रहलाद और नारद जी, अर्जुन और श्री कृष्ण , भक्त हनुमान और श्री राम , मीरा और गुरू रविदास , विवेकानंद और राम कृष्ण परमहंस जी ,योगानंद और युक्ते श्वर जी , चन्द्रगुप्त और चाण्कय जी कैसे अनंत उदाहरण है। भगवान राम गुरू वशिष्ठ जी की शरणगत हुए।श्री कृष्ण ने दुरवासा ऋषि जी से ज्ञान दीक्षा प्राप्त की। न केवल दीक्षा प्राप्त की, ब्लिक उतम कोटि की भक्ति भी की।उन्होने ने कहा कि गर्भवती मां को वेदों में दोहृदिनी कहा गया है ्र अर्थात देा हृदयों वाली का होता है। श्ष्यि की सारी भावनाएं प्यार और विश्वास गुरू तक पुहचता है। आगे साध्वी जी ने कहा कि मनुष्य जीवन का उदेश्य ईश्वर प्राप्ति है, पर ईश्वर को प्राप्त करने के लिए, एक नियम है कि गुरू के बिना हम ईश्वर तक नहीं पहुँच सकते। बलिक जब स्वयं भगवान भी इस धरा पर अवतार धारण करते है व भी इस नियम क पालन करते है तभी तो कहा गया है राम कृष्ण ते को बडो, तिनहुँ भी गुरू कीन। तीन लोक के नायका गुरू आगे आधीन। साध्वी जी ने कहा कि आज हम जिन अवतारों को अपना इष्ट मानकर इनकी पूजा करते है पर इनके आचरण से शिक्षा नही लेते। इन तीनों लोगों के नायकों ने गुरू का वरूण कर मानव जाति को संदेश दिया।अंत में उन्होने ने कहा कि गुरू ही एक जिज्ञासु को उसके अंतर्जगत में प्रभु का दर्शन करवाता है, प्रभु के अव्यकत नाम को शवासों में प्रकट करता है, दिव्यामृत का पान व अनहद नाद श्रवन करवाता है।इस अवसर पर श्री अविनाश राय खन्ना, श्री तीक्षण सूद, पुर्व कें द्रीय मंन्नी संतोष चौधरी,मेयर शिव सुद, राम लुभाया, संजीव तलवाड, पार्षद नीती तलवाड कमलजीत सेतिया,सुषमा सेतिया,अशौक चोपड़ा, आशुतोष शर्मा,पं शिवाधर चौबे, सोरभ भोपाल,पंं. सुरेश शर्मा,जगदीश अग्रवाल,आर.के. कोहली,अरबिंद शर्मा,सुमित गुप्ता,अनिल लडियार,सुनिल शर्मा, विजय अरोड़ा,अभिषेक ऐरी,पंकज कतना और शहर की संगत उपसिथत थी , संगत के लिए लंगर भी लगाया गया।

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