जो प्रभु परमात्मा को पहचान लेता है उसकी इच्छायें सीमित हो जाती हैं- श्री प्रभदयाल जी

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    जनगाथा। होशियारपुर । जो भी इन्सान वर्तमान सत्गुरू से परमात्मा की जानकारी प्राप्त कर इसे पहचान लेता है और फिर इसे मन में बसा लेता है उस इन्सान की न केवल दुनियावी धन दौलत प्राप्त करने की इच्छायें सीमित हो जाती हैं बल्कि उसका जीवन भी आनन्दमयी हो जाता है ये उद्गार शाहबाद मारकंडा से आए प्रचारक श्री प्रभदयाल जी ने आज गांव गोलपुरा में श्री शमसेर सिंह जी की पहली बरसी के उपलक्ष्य मे हुए निरंकारी सत्संग में सैकड़ों की संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए व्यक्त किए । श्री दयाल जी ने आगे कहा कि परमात्मा की जानकारी करने के बाद ज्यों-ज्यों इन्सान इससे अपना सबन्ध जोड़ता है त्यों-त्यों उस इन्सान की मनोस्थित भी स्थिर होने लग जाती है । जिसके परिणामस्वरूप गृहस्थ में रहते हुए जीवन में आने वाली उतराईयों-चढ़ाईयों से उसके मन पर उनका कोई प्रभाव नहीं पड़ता । परमात्मा को पहचानने के बाद उसे न केवल इस राज की जानकारी हो जाती है बल्कि एहसास भी होता है कि वास्तव में हर कार्य को करने कराने वाला एक परमपिता परमात्मा ही है।
    श्री दयाल ने यह भी बताया कि परमात्मा की जानकारी से इन्सान के मन में उजाला हो जाता है जिससे हर प्रकार के भ्रम भुलेखें मिट जाते है और संकीर्णताओं से भी इन्सान को छुटकारा मिलता है । फिर इन्सान के मन में किसी जाति विशेष के लिए नहीं बल्कि इस धरती पर रहने वाले हर प्राणी के प्रति उसके मन में प्यार, करूणा, दया का भाव होता है ।

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